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निजी स्कूलों को दी धनराशि, सरकारी को नहीं
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सांसद हरिनारायण राजभर अपने कार्यकाल में निजी स्कूलों पर काफी मेहरबान रहे। इन स्कूलों के लिए निधि की पोटली खोल दी। कई कई बार एक ही स्कूलों को भवन निर्माण आदि के लिए सहायता राशि दी गई। सरकार से सहायता प्राप्त स्कूलों अथवा सरकारी स्कूल सांसद की कृपा से वंचित रहे। यहां तक की आरएसएस के स्कूलों से सांसद निधि से धन नहीं दिया गया।
अपने कार्यकाल के पहले वित्तीय वर्ष 2014-15 में सांसद ने 10 निजी स्कूलों को धन दिया जबकि इसके बाद के अन्य कार्यकालों में 36 निजी स्कूलों को रकम दी गई है। इनमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्हें 20 लाख रुपये तक की रकम मिली। इनमें परमानंद इंटर कालेज कसारा सहित कई स्कूलों को एक से अधिक बार निधि से रकम दी गई। यह अलग बात है कि सांसद ने निजी स्कूलों को जो सहायता दी है वह गाइड लाइन के अनुरूप सांसद निधि के 20 प्रतिशत से कम ही है।
जिले में प्रदेश सरकार से सहायता प्राप्त प्रबंधकीय तंत्र से संचालित हाईस्कूूूल और इंटर कालेजों की संख्या 67 है। जबकि प्राइमरी से लेकर पीजी कालेज तक के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों कालेजों की संख्या 1134 है। जबकि दो राजकीय पीजी कालेज सहित राजकीय हाईस्कूल और इंटर कालेजों की संख्या जिले में 11 है। इनमें से प्रबंध तंत्र वाले सहायता प्राप्त हाई स्कूूूल और इंटर कालेजों के भवन सबसे अधिक पुराने और जीर्ण शीर्ण हो गए हैं। इन स्कूलों के लिए सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। फिर भी सांसद की नजरे इनायत इन स्कूलों पर नहीं हो सकी। इन कालेजों में कार्यरत अध्यापकों और शिक्षणेत्तर कर्मियों को वेतन आदि तो राज्य सरकार देती है लेकिन भवन निर्माण के लिए सरकार धन नहीं देती है।
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कोट
जरूरतमंद स्कूलों को गाइड लाइन के अनुरुप आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनता की मांग के अनुसार सीसी रोड, पुलिया और नाली निर्माण के लिए धन दिया गया है।
हरिनारायण राजभर , सांसद घोसी
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अपने कार्यकाल के पहले वित्तीय वर्ष 2014-15 में सांसद ने 10 निजी स्कूलों को धन दिया जबकि इसके बाद के अन्य कार्यकालों में 36 निजी स्कूलों को रकम दी गई है। इनमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्हें 20 लाख रुपये तक की रकम मिली। इनमें परमानंद इंटर कालेज कसारा सहित कई स्कूलों को एक से अधिक बार निधि से रकम दी गई। यह अलग बात है कि सांसद ने निजी स्कूलों को जो सहायता दी है वह गाइड लाइन के अनुरूप सांसद निधि के 20 प्रतिशत से कम ही है।
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जिले में प्रदेश सरकार से सहायता प्राप्त प्रबंधकीय तंत्र से संचालित हाईस्कूूूल और इंटर कालेजों की संख्या 67 है। जबकि प्राइमरी से लेकर पीजी कालेज तक के मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों कालेजों की संख्या 1134 है। जबकि दो राजकीय पीजी कालेज सहित राजकीय हाईस्कूल और इंटर कालेजों की संख्या जिले में 11 है। इनमें से प्रबंध तंत्र वाले सहायता प्राप्त हाई स्कूूूल और इंटर कालेजों के भवन सबसे अधिक पुराने और जीर्ण शीर्ण हो गए हैं। इन स्कूलों के लिए सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। फिर भी सांसद की नजरे इनायत इन स्कूलों पर नहीं हो सकी। इन कालेजों में कार्यरत अध्यापकों और शिक्षणेत्तर कर्मियों को वेतन आदि तो राज्य सरकार देती है लेकिन भवन निर्माण के लिए सरकार धन नहीं देती है।
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जरूरतमंद स्कूलों को गाइड लाइन के अनुरुप आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनता की मांग के अनुसार सीसी रोड, पुलिया और नाली निर्माण के लिए धन दिया गया है।
हरिनारायण राजभर , सांसद घोसी