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बेस लाइन सर्वे में नाम न होने का खामियाजा भुगत रहे गरीब
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:13 PM IST
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सरकार द्वारा वर्ष 2012 में कराई बेस लाइन सर्वे में नाम न शामिल हो पाने का खामियाजा पात्र गरीबों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में ऐसे बहुत से गरीब हैं जो सर्वे के समय अपना नाम सूची में शामिल नहीं करा पाए थे। ऐसे गरीबों को शौचालय का लाभ नहीं मिल सका है। इसी प्रकार सेक सर्वे 2004 और सेक सर्वे 2009 में भी ऐसे सैकड़ों गरीबों के नाम नहीं शामिल किए गए जिससे उन्हें आवासों से वंचित होना पड़ रहा है। सेक सर्वें में तो घोसी ब्लाक के बरुहा सहित जिले के कई गांव ही शामिल नहीं किए गए हैं।
शौचालयों के आवंटन के लिए बेस लाइन सर्वे 2012 की सूची के अनुसार ही पात्रों को शौचालय का आंवटन किये जाने की गाइड लाइन है। सर्वे के दौरान सैकड़ों ऐसे लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया जिनके पास पक्के मकान ,वाहन, कार आदि सब कुछ संसाधन मौजूद हैं। लेकिन सैकड़ों ऐसे लोग वंचित रह गए जो वास्तव में पात्र थे। जिले में वर्ष 2004 और 2009 में सेक यानी सामाजिक आर्थिक गणना कराई गई थी। जिसमें 17 कालम थे। इसमें 17 अंक से कम पाने वाले को गरीब की श्रेणी में रखा गया। 2004 की सेक सर्वे में प्रदेश में कुल छह करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे पाए गए थे। फिर पांच साल बाद कराई गई गणना में गरीबों की संख्या बढ़कर आठ करोड हो गई। इस भारी वृद्धि पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताया। इसके बाद सेक सर्वे 2004 की सूची के अनुसार ही आवासों के आंवटन किए जा रहे हैं।
इस बाबत सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी का कहना है कि गाईड लाइन के अनुसार आवासों और शौचालयों के आवंटन किये गये हैं। सूची में वंचित गरीबों को भी आवासों और शौचालयों के आवंटन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन सेट
केस -1
रानीपुर ब्लाक के औसतपुर निवासी आरिफ बेग के पास अपना घर नहीं है। वह किराए के एक मकान में रहकर गुजर बसर करता है। आरिफ खेतों में मजदूरी करके अपने किसी तरह तंगहाली में अपने परिवार का पालन पोषण करता है। लेकिन इसे एक अदद आवास नहीं मिला और जब आवास ही नहीं मिला तो शौचालय कहां से मिलता।इसका नाम न तो बेस लाइन सर्वे में है और न ही सेक सर्वे में।
केस- 2
चिरैयाकोट निवासी मिठाई चौहान पुत्र राम बली का एक घर तो है लेकिन वह इतना जर्जर है कि बरसात में इसका परिवार हर रोज ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उसका घर गिरे नहीं, सही सलामत बचा रहे। मिठाई ठेला चलाकर अपने परिवार की परवरिश करता है। लेकिन उसे न तो आवास मिला और नहीं शौचालय। मिठाई का नाम भी न तो बेस लाइन सर्वे में है और न ही सेक सर्वे में।
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शौचालयों के आवंटन के लिए बेस लाइन सर्वे 2012 की सूची के अनुसार ही पात्रों को शौचालय का आंवटन किये जाने की गाइड लाइन है। सर्वे के दौरान सैकड़ों ऐसे लोगों ने अपना नाम दर्ज करा लिया जिनके पास पक्के मकान ,वाहन, कार आदि सब कुछ संसाधन मौजूद हैं। लेकिन सैकड़ों ऐसे लोग वंचित रह गए जो वास्तव में पात्र थे। जिले में वर्ष 2004 और 2009 में सेक यानी सामाजिक आर्थिक गणना कराई गई थी। जिसमें 17 कालम थे। इसमें 17 अंक से कम पाने वाले को गरीब की श्रेणी में रखा गया। 2004 की सेक सर्वे में प्रदेश में कुल छह करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे पाए गए थे। फिर पांच साल बाद कराई गई गणना में गरीबों की संख्या बढ़कर आठ करोड हो गई। इस भारी वृद्धि पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताया। इसके बाद सेक सर्वे 2004 की सूची के अनुसार ही आवासों के आंवटन किए जा रहे हैं।
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इस बाबत सीडीओ आशुतोष कुमार द्विवेदी का कहना है कि गाईड लाइन के अनुसार आवासों और शौचालयों के आवंटन किये गये हैं। सूची में वंचित गरीबों को भी आवासों और शौचालयों के आवंटन करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन सेट
केस -1
रानीपुर ब्लाक के औसतपुर निवासी आरिफ बेग के पास अपना घर नहीं है। वह किराए के एक मकान में रहकर गुजर बसर करता है। आरिफ खेतों में मजदूरी करके अपने किसी तरह तंगहाली में अपने परिवार का पालन पोषण करता है। लेकिन इसे एक अदद आवास नहीं मिला और जब आवास ही नहीं मिला तो शौचालय कहां से मिलता।इसका नाम न तो बेस लाइन सर्वे में है और न ही सेक सर्वे में।
केस- 2
चिरैयाकोट निवासी मिठाई चौहान पुत्र राम बली का एक घर तो है लेकिन वह इतना जर्जर है कि बरसात में इसका परिवार हर रोज ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उसका घर गिरे नहीं, सही सलामत बचा रहे। मिठाई ठेला चलाकर अपने परिवार की परवरिश करता है। लेकिन उसे न तो आवास मिला और नहीं शौचालय। मिठाई का नाम भी न तो बेस लाइन सर्वे में है और न ही सेक सर्वे में।