{"_id":"5b8438f242c79246382cfa31","slug":"21535391986-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन सेमी और घटा जलस्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन सेमी और घटा जलस्तर
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाघरा का जलस्तर सोमवार को तीन सेमी और घट गया। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। जबकि कटान होने की आशंका से लोग अभी भी दहशत में हैं।
घाघरा के बार बार घटने व बढने से लोग भयभीत है। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही हैं। इससे नगर का मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला सहित ऐतिहासिक धरोहरे खतरे की जद में है। क्योंकि नदी अभी भी खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर बह रही है। सोमवार को नदी का जलस्तर 70.12 मीटर रहा। जबकि रविवार को यह 70.15 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर तीन सेमी और घटा। नदी के खतरे का निशान 69.90 मीटर है।
वहीं तटवर्ती इलाकों नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग कटान होने की आशंका से दहशजदा हैं। वहीं किसानों की फसलें अभी भी बाढ़ के पानी में डूबी हैं। कटान पीड़ितों का कहना था कि जब-जब नदी का जलस्तर घटता बढ़ता है। नदी कहर बरपाती है। क्षेत्र के राकेश कुमार शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, श्रीकिशुन सिंह, संजय सिंह ने कहा कि अभी भी प्रशासन ने बाढ़ की समस्या से उन्हे निजात दिलाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में पशुओं के चारे की समस्या और आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था भी नहीं के बराबद है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित कदम उठाए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
घाघरा के बार बार घटने व बढने से लोग भयभीत है। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही हैं। इससे नगर का मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला सहित ऐतिहासिक धरोहरे खतरे की जद में है। क्योंकि नदी अभी भी खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर बह रही है। सोमवार को नदी का जलस्तर 70.12 मीटर रहा। जबकि रविवार को यह 70.15 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे में घाघरा का जलस्तर तीन सेमी और घटा। नदी के खतरे का निशान 69.90 मीटर है।
वहीं तटवर्ती इलाकों नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग कटान होने की आशंका से दहशजदा हैं। वहीं किसानों की फसलें अभी भी बाढ़ के पानी में डूबी हैं। कटान पीड़ितों का कहना था कि जब-जब नदी का जलस्तर घटता बढ़ता है। नदी कहर बरपाती है। क्षेत्र के राकेश कुमार शर्मा, राजेंद्र प्रसाद, श्रीकिशुन सिंह, संजय सिंह ने कहा कि अभी भी प्रशासन ने बाढ़ की समस्या से उन्हे निजात दिलाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए हैं। ऐसे में पशुओं के चारे की समस्या और आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था भी नहीं के बराबद है। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित कदम उठाए जाने की मांग की है।
विज्ञापन