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शिवमहापुराण कथा श्रवण से नष्ट हो जाता है कई जन्मों का पाप
Updated Wed, 07 Nov 2018 01:12 AM IST
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मां विंध्यवासिनी सेवा समिति के तत्वावधान में भीटी में चल रहे शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन रविंद्र जी महाराज ने कहा कि भूल चूक भ्रांति भावना सब मनुष्य के लक्षण हैं। प्रायश्चित ही एक ऐसा मार्ग है, जिससे अपने किए गए भूल की मुक्ति मिल सकती है और मन को शांति मिल सकती है। भावना विहीन मनुष्य एक पशु के समान होता है, क्योंकि जिस मनुष्य के अंदर भावना नहीं है तो उसके अंदर प्रेम, दयाभाव, करुणा नहीं हो सकती है।
शिव महापुराण के महत्व के संबंध में बताया कि जो मनुष्य शिव महापुराण कथा को सुनता है तो उसके कई जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है। देवों के देव महादेव ही एक ऐसे देवता हैं, जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। कार्तिकेय पुत्र की उत्पत्ति के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिवजी तुम्हारे नाम से गुजारा हमारा गुजारा हमारा की मधुर गीत से पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रात:कालीन बेला में रुद्राभिषेक का भी कार्यक्रम होता है। पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करके रुद्राभिषेक करने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। पाप एक प्रकार का अंधेरा होता है जो ज्ञान का प्रकाश होते ही मिट जाता है। ईश्वर की कोई वैदिक परिभाषा नहीं होती है, उसको आत्मा के अनुभूत से ही जाना जा सकता है। बताया कि दीपावली के दिन एक जलता हुआ दीपक यहां से दिया जाएगा, लोग अपने घरों में ले जाकर जलाएंगे। यहां पर आवाहन किए गए देवी देवताओं द्वारा मंत्र से दीपक प्रज्ज्वलित किया जाएगा, जिसका प्रभाव आपके जीवन में बहुत ही चमत्कारिक होता है। कार्यक्रम के समापन पर आरती हुई। इसके पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।
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शिव महापुराण के महत्व के संबंध में बताया कि जो मनुष्य शिव महापुराण कथा को सुनता है तो उसके कई जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है। देवों के देव महादेव ही एक ऐसे देवता हैं, जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। कार्तिकेय पुत्र की उत्पत्ति के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। शिवजी तुम्हारे नाम से गुजारा हमारा गुजारा हमारा की मधुर गीत से पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रात:कालीन बेला में रुद्राभिषेक का भी कार्यक्रम होता है। पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करके रुद्राभिषेक करने से कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। पाप एक प्रकार का अंधेरा होता है जो ज्ञान का प्रकाश होते ही मिट जाता है। ईश्वर की कोई वैदिक परिभाषा नहीं होती है, उसको आत्मा के अनुभूत से ही जाना जा सकता है। बताया कि दीपावली के दिन एक जलता हुआ दीपक यहां से दिया जाएगा, लोग अपने घरों में ले जाकर जलाएंगे। यहां पर आवाहन किए गए देवी देवताओं द्वारा मंत्र से दीपक प्रज्ज्वलित किया जाएगा, जिसका प्रभाव आपके जीवन में बहुत ही चमत्कारिक होता है। कार्यक्रम के समापन पर आरती हुई। इसके पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।
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