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विभागीय उपेक्षा से शो पीस बनकर रह गई हैं मिनी मंडियां
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:43 PM IST
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मऊ। सरकार की ओर से किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए तमाम कवायद विभागीय उदासीनता के चलते बेअसर साबित हो रही है। विभाग की तरफ से दो ब्लाक के तीन गांवों में किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए लाखों की लागत से मिनी मंडी की स्थापना कराई गई। साथ ही दूकानों का आवंटन भी कर दिया गया है, लेकिन कागज में ही मंडी का संचालन हो रहा है। सब कुछ जानकर भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
जिले में धान, गेहूं, गन्ना, सब्जी, फल सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। लेकिन हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकार की तरफ से किसानों के फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिला मुख्यालय के भुजौटी में कृषि मंडी की स्थापना की गई है। यहां मंडी का संचालन तो हो रहा है। लेकिन योजना का व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार न होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा मंडी समिति की तरफ वर्षो पूर्व लाखों की लागत से कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के लैरोदोनवार, परदहां ब्लाक क्षेत्र के डुमरांव, ताजोपुर गांव में मिनी मंडी की स्थापना की गई। यहां टिनशेड, चबूतरा समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराने में मंडी समिति पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन लंबे समय बाद भी अफसरों की लापरवाही के चलते यह मंडियां संचालित नहीं हो सकी है। हालत यह है कि विभाग की तरफ से मिनी मंडी में बनी दूकानों का आवंटन भी कर दिया गया है। दूकानदारों, व्यापारियों द्वारा प्रतिमाह किराया भी जमा कराया जा रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारी मंडी को चालू कराने मेें रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे यह मंडियां आवारा पशुओं और अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। इस संबंध में मंडी समिति के सचिव विजय बहादुर दुबे का कहना है कि किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए मंडी समितियों को चालू कराया जाने का प्रयास जारी है।
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जिले में धान, गेहूं, गन्ना, सब्जी, फल सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। लेकिन हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद भी किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकार की तरफ से किसानों के फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिला मुख्यालय के भुजौटी में कृषि मंडी की स्थापना की गई है। यहां मंडी का संचालन तो हो रहा है। लेकिन योजना का व्यापक पैमाने पर प्रचार-प्रसार न होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा मंडी समिति की तरफ वर्षो पूर्व लाखों की लागत से कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के लैरोदोनवार, परदहां ब्लाक क्षेत्र के डुमरांव, ताजोपुर गांव में मिनी मंडी की स्थापना की गई। यहां टिनशेड, चबूतरा समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराने में मंडी समिति पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन लंबे समय बाद भी अफसरों की लापरवाही के चलते यह मंडियां संचालित नहीं हो सकी है। हालत यह है कि विभाग की तरफ से मिनी मंडी में बनी दूकानों का आवंटन भी कर दिया गया है। दूकानदारों, व्यापारियों द्वारा प्रतिमाह किराया भी जमा कराया जा रहा है। लेकिन विभागीय अधिकारी मंडी को चालू कराने मेें रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे यह मंडियां आवारा पशुओं और अराजकतत्वों का अड्डा बन गया है। इस संबंध में मंडी समिति के सचिव विजय बहादुर दुबे का कहना है कि किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए मंडी समितियों को चालू कराया जाने का प्रयास जारी है।
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