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धमकी के मामले में मां बेटे को दो वर्ष की सजा
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:51 PM IST
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मऊ। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में नामजद मां बेटे को दोषी पाते हुए दो-दो वर्ष की सजा का निर्णय सुनाया। वही गर्भपात के मामले में संदेह का लाभ कर देकर दोषमुक्त कर दिया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला चंद्रभानपुर निवासी ऊषा देवी पत्नी रमेश की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही ललिया देवी पत्नी महेश और सुरेंद्र राजभर पुत्र महेश को आरोपी बनाया। वादिनी का आरोप था कि वह 16 जुलाई 2010 को अपराह्न दो बजे धान की रोपाई करने जा रही थी । उसी दौरान बकरी चराने की बात को लेकर वादिनी को मारेपीटे तथा जान से मारने की धमकी दिए। वादिनी की तहरीर पर पुलिस ने धारा 323, 506, 504 भादंवि के तहत एनसीआर दर्ज किया। बाद में विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में 316 भादवि की बढोत्तरी करते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए डीसीजी फौजदारी हरिद्वार राय, एडीजीसी मणीबहादुर सिंह और अधिवक्ता अनिल सिंह ने पैरवी करते हुए कुल छह गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्को केे सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण ललिया और सुरेंद्र को मारपीट और धमकी का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद मारपीट में छह माह की सजा तथा धमकी के मामले में दो वर्ष की सजा का निर्णय सुनाया। वही गर्भपात के मामले में दोषमुक्त कर दिया।
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मामले के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला चंद्रभानपुर निवासी ऊषा देवी पत्नी रमेश की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही ललिया देवी पत्नी महेश और सुरेंद्र राजभर पुत्र महेश को आरोपी बनाया। वादिनी का आरोप था कि वह 16 जुलाई 2010 को अपराह्न दो बजे धान की रोपाई करने जा रही थी । उसी दौरान बकरी चराने की बात को लेकर वादिनी को मारेपीटे तथा जान से मारने की धमकी दिए। वादिनी की तहरीर पर पुलिस ने धारा 323, 506, 504 भादंवि के तहत एनसीआर दर्ज किया। बाद में विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में 316 भादवि की बढोत्तरी करते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए डीसीजी फौजदारी हरिद्वार राय, एडीजीसी मणीबहादुर सिंह और अधिवक्ता अनिल सिंह ने पैरवी करते हुए कुल छह गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। जिला जज ने दोनों पक्षों के तर्को केे सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण ललिया और सुरेंद्र को मारपीट और धमकी का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद मारपीट में छह माह की सजा तथा धमकी के मामले में दो वर्ष की सजा का निर्णय सुनाया। वही गर्भपात के मामले में दोषमुक्त कर दिया।
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