{"_id":"59529b8e4f1c1ba10a8b477f","slug":"201498585998-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी से बिगड़ेगी बुनकरों की दशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी से बिगड़ेगी बुनकरों की दशा
Updated Tue, 27 Jun 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। केंद्र सरकार ने अबकी बार कपड़े पर भी जीएसटी लगा दिया है। जीएसटी लागू होने पर मऊ की पहचान बुनकरी के कारोबार पर ग्रहण लग सकता है। जीएसटी की संभावित मार से डरे व्यापारी आढ़तियों के आर्डर कैंसिल कराने लगे हैं। जिन आढ़तियों ने आर्डर पर माल प्रदेश के बाहर महानगरों में भेज दिया था व्यापारी अब उन साड़ियों को वापस भेजने लगे हैं। आढ़तियों के प्रतिष्ठानों पर इन दिनों कोई भी ग्राहक नहीं आ रहे हैं। आढ़तियों का कहना है कि यदि जीएसटी में संशोधन नहीं हुआ तो उन्हें कारोबार बंद करना पड़ेगा। जनपद में बनने वाली साड़ियों का कारोबार सालाना दो हजार करोड़ रुपयों का है। वर्तमान जीएसटी में यदि संशोधन नहीं हुए और स्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो मऊ के दो हजार करोड़ के इस कारोबार पर ग्रहण लग सकता है।
एक साड़ी पर लग रहा तीन बार टैक्स
मऊ (ब्यूरो)। एक देश एक कर के नारे के साथ केंद्र सरकार ने पहली जुलाई से जीएसटी लागू करने का फैसला किया है। लेकिन पावरलूम पर बनने वाली मऊ की साड़ियों पर एक बार नहीं तीन बार टैक्स लगाए जाएंगे। मऊ की साड़ियों के थोक कारोबारी पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल कहते हैं कि मऊ में बुनकर हाथ से साड़ियां तैयार करता है। इसके लिए धागे सूरत, मुंबई और बेंगलूरु आदि महानगरों से मंगाए जाते हैं। इन धागों पर 13 प्रतिशत जीएसटी लागू है। साड़ियों में प्रयुक्त होने वाले चिप्स पर पांच प्रतिशत जीएसटी और तैयार साड़ी पर पांच प्रतिशत जीएसटी देनी होगी। इस प्रकार मऊ नगरी में तानेबाने पर तैयार होने वाली साड़ियों पर कुल 23 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
मजदूरों की मजदूरी पर भी जीएसटी
मऊ(ब्यूरो)। जीएसटी की जद में आने वाली मऊ के साड़ी कारोबार को इस तरह समझा जा सकता है। किसी साड़ी के लिए दो सौ रुपये का धागा लगता है। इसको तैयार करने वाले बुनकर की रंगाई , बुनाई, वेस्टेज और मजदूरी दो सौ रुपये, पचास रुपये पैकिंग चार्ज और आढ़तियों के लाभ सहित कुल पांच सौ रुपये साड़ी की कीमत हुई। इस प्रकार मजदूरों की मजदूरी पर भी जीएसटी लग रही है।
विज्ञापन
आढ़तियों के आर्डर होने लगे कैंसिल
मऊ(ब्यूरो)। जीएसटी लागू होने की सूचना से बाहर के व्यापारियों ने आर्डर कैंसिल कराना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं जो साड़ियां हाल के दिनों में बाहर भेज दी गई थीं ,उन्हें भी आढ़तिये वापस करने लगे हैं। थोक कारोबारी साजिद अनवर कहते हैं कि इससे इस कारोबार का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
30 को कारोबार रहेगा बंद
मऊ(ब्यूरो)। कपड़े पर जीएसटी के विरोध में टेक्सटाइल से जुड़े कारोबारी 30 जून को अपने कारोबार बंद रखेंगे। साड़ी कारोबारी और उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डा. राम गोपाल गुप्त कहते हैं कि अंग्रेजों के शासन काल में भी कपड़े पर कोई टैक्स नहीं लगता था लेकिन वर्तमान सरकार ने साड़ी और कपड़े पर टैक्स लगाकर आम आदमी को प्रभावित किया है।
जीएसटी लागू होने से हस्तशिल्पी बेरोजगार हो जाएंगे
मऊ(ब्यूरो)। साड़ी कारोबारी रामगोपाल गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से मऊ के हस्तशिल्पी बेरोजगार हो जाएंगे। बताते हैं कि एक साड़ी पर एंब्रायडरी अथवा मोती लगाने के लिए हस्तशिल्पी को 40 रुपये दिए जाते हैं। यदि साड़ी की कीमत तीन सौ रुपये है तो उस पर 36 रुपये जीएसटी लग जाएगी। इस प्रकार कारीगर को केवल चार रुपये बचेंगे। तो भला चार रुपये में कोई कारीगर चार से पांच घंटे तक काम कैसे करेगा। वाणिज्य कर के अधिवक्ता रतन गुप्ता कहते हैं कि एक तो मऊ के साड़ी कारोबार में पिछले दस सालों से मंदी छाई हुई है। अब जीएसटी लगने से यह कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।
विज्ञापन
एक साड़ी पर लग रहा तीन बार टैक्स
मऊ (ब्यूरो)। एक देश एक कर के नारे के साथ केंद्र सरकार ने पहली जुलाई से जीएसटी लागू करने का फैसला किया है। लेकिन पावरलूम पर बनने वाली मऊ की साड़ियों पर एक बार नहीं तीन बार टैक्स लगाए जाएंगे। मऊ की साड़ियों के थोक कारोबारी पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल कहते हैं कि मऊ में बुनकर हाथ से साड़ियां तैयार करता है। इसके लिए धागे सूरत, मुंबई और बेंगलूरु आदि महानगरों से मंगाए जाते हैं। इन धागों पर 13 प्रतिशत जीएसटी लागू है। साड़ियों में प्रयुक्त होने वाले चिप्स पर पांच प्रतिशत जीएसटी और तैयार साड़ी पर पांच प्रतिशत जीएसटी देनी होगी। इस प्रकार मऊ नगरी में तानेबाने पर तैयार होने वाली साड़ियों पर कुल 23 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
विज्ञापन
मजदूरों की मजदूरी पर भी जीएसटी
मऊ(ब्यूरो)। जीएसटी की जद में आने वाली मऊ के साड़ी कारोबार को इस तरह समझा जा सकता है। किसी साड़ी के लिए दो सौ रुपये का धागा लगता है। इसको तैयार करने वाले बुनकर की रंगाई , बुनाई, वेस्टेज और मजदूरी दो सौ रुपये, पचास रुपये पैकिंग चार्ज और आढ़तियों के लाभ सहित कुल पांच सौ रुपये साड़ी की कीमत हुई। इस प्रकार मजदूरों की मजदूरी पर भी जीएसटी लग रही है।
विज्ञापन
आढ़तियों के आर्डर होने लगे कैंसिल
मऊ(ब्यूरो)। जीएसटी लागू होने की सूचना से बाहर के व्यापारियों ने आर्डर कैंसिल कराना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं जो साड़ियां हाल के दिनों में बाहर भेज दी गई थीं ,उन्हें भी आढ़तिये वापस करने लगे हैं। थोक कारोबारी साजिद अनवर कहते हैं कि इससे इस कारोबार का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
30 को कारोबार रहेगा बंद
मऊ(ब्यूरो)। कपड़े पर जीएसटी के विरोध में टेक्सटाइल से जुड़े कारोबारी 30 जून को अपने कारोबार बंद रखेंगे। साड़ी कारोबारी और उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डा. राम गोपाल गुप्त कहते हैं कि अंग्रेजों के शासन काल में भी कपड़े पर कोई टैक्स नहीं लगता था लेकिन वर्तमान सरकार ने साड़ी और कपड़े पर टैक्स लगाकर आम आदमी को प्रभावित किया है।
जीएसटी लागू होने से हस्तशिल्पी बेरोजगार हो जाएंगे
मऊ(ब्यूरो)। साड़ी कारोबारी रामगोपाल गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से मऊ के हस्तशिल्पी बेरोजगार हो जाएंगे। बताते हैं कि एक साड़ी पर एंब्रायडरी अथवा मोती लगाने के लिए हस्तशिल्पी को 40 रुपये दिए जाते हैं। यदि साड़ी की कीमत तीन सौ रुपये है तो उस पर 36 रुपये जीएसटी लग जाएगी। इस प्रकार कारीगर को केवल चार रुपये बचेंगे। तो भला चार रुपये में कोई कारीगर चार से पांच घंटे तक काम कैसे करेगा। वाणिज्य कर के अधिवक्ता रतन गुप्ता कहते हैं कि एक तो मऊ के साड़ी कारोबार में पिछले दस सालों से मंदी छाई हुई है। अब जीएसटी लगने से यह कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।