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स्वावलंबी बनाने के लिए उपयोगी साबित होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
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मऊ। राजकीय फल संरक्षक केंद्र में एक माह का उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण एक माह तक चलेगा। 13 अप्रैल 2019 तक प्रशिक्षण विशेष प्रशिक्षकों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्घाटन खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी भुवनेश्वरी गौतम ने किया।
इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी भुवनेश्वरी गौतम ने कहा कि आज के बेरोजगारी के समय में यह प्रशिक्षण स्वावलंबी बनाने के लिए यह बहुत ही उपयोगी साबित होगा। खाद्य संरक्षण एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीकी है जिसकी सहायता से खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सूक्ष्म जीवों से बचाकर संरक्षित कर उपयोगी बनाकर रख सकते हैं। फल, सब्जियों, अनाज, दालों, दूध, मांस, मछली, अंडा, मसालों तथा अन्य पदार्थो से अन्य निर्मित उत्पादकों को खराब होने से बचाकर लंबे समय तक उपयोग के लिए संरक्षित करने के साथ ही उनके मूल्य वृद्धि करने की प्रक्रिया को खाद्य प्रसंस्करण कहते हैं। इसी क्रम में प्रशिक्षक नंदलाल यादव ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया है कि आधुनिक तकनीकी की सहायता से खाद्य पदार्थ तथा फल, सब्जी, अनाज आदि का उत्पादन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। सरल खाद्य तकनीकी के अभाव में इन उत्पादन का बहुत बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है। प्रशिक्षक त्रिभुवन राम ने कहा कि स्वच्छता का गुणवत्ता नियंत्रण में 80 प्रतिशत योगदान है। यदि व्यक्ति खाद्य पदार्थो के उत्पादन से उपभोग तक समक्ष चरणों में स्वच्छता का ध्यान रखे तों मनुष्य को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपभोग के लिए प्राप्त हो सकेगा। इस अवसर पर अनिता यादव, तारा यादव, कुमार चंदा, सरिता, दीपक कुमार, राहुल यादव, पवन, पवन कुमारआदि शामिल रहे।
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इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी भुवनेश्वरी गौतम ने कहा कि आज के बेरोजगारी के समय में यह प्रशिक्षण स्वावलंबी बनाने के लिए यह बहुत ही उपयोगी साबित होगा। खाद्य संरक्षण एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीकी है जिसकी सहायता से खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सूक्ष्म जीवों से बचाकर संरक्षित कर उपयोगी बनाकर रख सकते हैं। फल, सब्जियों, अनाज, दालों, दूध, मांस, मछली, अंडा, मसालों तथा अन्य पदार्थो से अन्य निर्मित उत्पादकों को खराब होने से बचाकर लंबे समय तक उपयोग के लिए संरक्षित करने के साथ ही उनके मूल्य वृद्धि करने की प्रक्रिया को खाद्य प्रसंस्करण कहते हैं। इसी क्रम में प्रशिक्षक नंदलाल यादव ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा बताया गया है कि आधुनिक तकनीकी की सहायता से खाद्य पदार्थ तथा फल, सब्जी, अनाज आदि का उत्पादन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। सरल खाद्य तकनीकी के अभाव में इन उत्पादन का बहुत बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है। प्रशिक्षक त्रिभुवन राम ने कहा कि स्वच्छता का गुणवत्ता नियंत्रण में 80 प्रतिशत योगदान है। यदि व्यक्ति खाद्य पदार्थो के उत्पादन से उपभोग तक समक्ष चरणों में स्वच्छता का ध्यान रखे तों मनुष्य को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपभोग के लिए प्राप्त हो सकेगा। इस अवसर पर अनिता यादव, तारा यादव, कुमार चंदा, सरिता, दीपक कुमार, राहुल यादव, पवन, पवन कुमारआदि शामिल रहे।
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