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युवाओं में उर्दू से बढ़ रही है दूरी: डॉ. शबाबुद्दीन
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मऊ। सेव द ह्यूमनिटी फाउंडेशन तथा उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी लखनऊ के तत्वाधान में रविवार को फजा-इब्ने-फैजी के व्यक्तित्व (फन और शख्सियत) पर एक सेमिनार का आयोजन नगर पालिका परिषद में किया गया।
कार्यक्रम में शिब्ली नेशनल कॉलेज के उर्दू विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शबाबुद्दीन ने कहा कि उर्दू अदब सियासत का शिकार है, बच्चों की उर्दू से दूरी बढ़ती जा रही है। इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि किताबें जिंदगी का आईना होती हैं, किताबें और उसके पढ़ने वालों के बीच गहरा संबंध होता है। कहा कि फजा-इब्ने-फैजी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि युवा पीढ़ी को फजा साहब और उनकी शायरी से इन्हें रूबरू कराया जाए। वहीं डॉ. एम. नसीम आजमी द्वारा फजा-इब्ने-फैजी पर लिखे गए लेख को मुख्य रूप से उपस्थित डॉ. शमशाद ने पेश करते हुए कहा कि समाज से शायर का गहरा रिश्ता होता है। जिसका उदाहरण फजा -इब्ने-फैजी की शायरी में देखने को मिलता है। कहा कि डॉ. शकील द्वारा लिखी शायरी पढ़ने वाले को अपनी तरफ आकर्षित करती है, कहीं-कहीं यह अपनी शायरी में अपने समाज से काफी मायूस भी नजर आते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष मोहम्मद तय्यब पालकी ने अदब तथा उर्दू से लोगों की हो रही दूरी पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि हमें इस तरह के सेमिनार करने की आवश्यकता है। इस मौके पर डॉ. इम्तियाज नदीम, डॉ. तारिक मंसूर ने अपने विचार रखे। इस मौके पर मोहम्मद आरिफ, जलाल अहमद, मैकश आजमी, डॉ. मोहम्मद ज्याउल्लाह, ओजैर अहमद गृहस्थ, डॉ. रफीक अशफाक, शमीम अहमद, डॉ. अरशद जमील, सईदुज्जफर, मुनव्वर अब्दुल गफूर आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में शिब्ली नेशनल कॉलेज के उर्दू विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. शबाबुद्दीन ने कहा कि उर्दू अदब सियासत का शिकार है, बच्चों की उर्दू से दूरी बढ़ती जा रही है। इस पर भी विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि किताबें जिंदगी का आईना होती हैं, किताबें और उसके पढ़ने वालों के बीच गहरा संबंध होता है। कहा कि फजा-इब्ने-फैजी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि युवा पीढ़ी को फजा साहब और उनकी शायरी से इन्हें रूबरू कराया जाए। वहीं डॉ. एम. नसीम आजमी द्वारा फजा-इब्ने-फैजी पर लिखे गए लेख को मुख्य रूप से उपस्थित डॉ. शमशाद ने पेश करते हुए कहा कि समाज से शायर का गहरा रिश्ता होता है। जिसका उदाहरण फजा -इब्ने-फैजी की शायरी में देखने को मिलता है। कहा कि डॉ. शकील द्वारा लिखी शायरी पढ़ने वाले को अपनी तरफ आकर्षित करती है, कहीं-कहीं यह अपनी शायरी में अपने समाज से काफी मायूस भी नजर आते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष मोहम्मद तय्यब पालकी ने अदब तथा उर्दू से लोगों की हो रही दूरी पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि हमें इस तरह के सेमिनार करने की आवश्यकता है। इस मौके पर डॉ. इम्तियाज नदीम, डॉ. तारिक मंसूर ने अपने विचार रखे। इस मौके पर मोहम्मद आरिफ, जलाल अहमद, मैकश आजमी, डॉ. मोहम्मद ज्याउल्लाह, ओजैर अहमद गृहस्थ, डॉ. रफीक अशफाक, शमीम अहमद, डॉ. अरशद जमील, सईदुज्जफर, मुनव्वर अब्दुल गफूर आदि मौजूद रहे।
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