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असत्य पर सदैव सत्य की होती है जीत: पं. किशोरी शरण महाराज
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:28 AM IST
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बुराई चाहे जितनी ताकतवर हो, वो एक दिन अच्छाई से हार ही जाती है। अच्छाई के मार्गो पर चलने वाले मनुष्य कुछ समय के लिए दुखी हो सकते हैं, लेकिन हताश नहीं। क्योंकि भगवान सच्चे मार्गो पर चलने वाले अपने भक्तों को समस्याओं से उबार देते हैं। इसलिए जीवन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हम असत्य का त्याग करके सत्य की तरफ चलें। यह विचार ब्लाक के ग्रामसभा चेरा रामका पूरा में जारी रामायण कथा के समापन पर रविवार की शाम कथा वाचक पं. किशोरी शरण महाराज ने मौजूद कही। कथा के आखिरी दिन कथावाचक ने श्रोताओं को सीता हरण, लंका दहन, राम-रावण युद्ध, विभीषण का राज्याभिषेक वर्णन सुनाकर भावविभोर कर दिया।
कथा के समापन पर मौजूद श्रोताओं को प्रभु राम के राजतिलक का वर्णन करते हुए कथावाचक पं.किशोरी शरण महाराज ने कहा कि रामायण हमें जीने के तरीके सिखाती है। दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। 14 वर्ष का वनवास और पापी रावण का वध कर जब श्रीराम माता सीता, अनुज लक्ष्मण और हनुमान के साथ वापस अयोध्या पहुंचते है। जहां प्रभु के स्वागत में अयोध्यावासी खुश होने के साथ अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए अपने अपने घरों में दीपक जलाते है। कहा कि रामायण हमें आदर, सेवा भाव, त्याग और बलिदान के साथ का भाव सिखाती है। श्रीराम के राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए कहा कि लाख बुराई और असत्य कितने ही ताकतवर हो, लेकिन उनका अंत सुनिश्वित है। अधर्म पर धर्म की जीत हमेशा होती आई है। श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के दौरान पूरे पंडाल में पुष्पों की वर्षा श्रोताओं ने की। इस मौके पर विपिन त्रिपाठी, सत्येंद्र त्रिपाठी ,प्रदीप ,साधु, पंकज तिवारी, समीर तिवारी ,विनोद ,अशोक खरवार सहित अन्य मौजूद रहे।
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कथा के समापन पर मौजूद श्रोताओं को प्रभु राम के राजतिलक का वर्णन करते हुए कथावाचक पं.किशोरी शरण महाराज ने कहा कि रामायण हमें जीने के तरीके सिखाती है। दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। 14 वर्ष का वनवास और पापी रावण का वध कर जब श्रीराम माता सीता, अनुज लक्ष्मण और हनुमान के साथ वापस अयोध्या पहुंचते है। जहां प्रभु के स्वागत में अयोध्यावासी खुश होने के साथ अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए अपने अपने घरों में दीपक जलाते है। कहा कि रामायण हमें आदर, सेवा भाव, त्याग और बलिदान के साथ का भाव सिखाती है। श्रीराम के राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए कहा कि लाख बुराई और असत्य कितने ही ताकतवर हो, लेकिन उनका अंत सुनिश्वित है। अधर्म पर धर्म की जीत हमेशा होती आई है। श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के दौरान पूरे पंडाल में पुष्पों की वर्षा श्रोताओं ने की। इस मौके पर विपिन त्रिपाठी, सत्येंद्र त्रिपाठी ,प्रदीप ,साधु, पंकज तिवारी, समीर तिवारी ,विनोद ,अशोक खरवार सहित अन्य मौजूद रहे।
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