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मोटी फीस लेने के बाद भी बच्चों को नहीं मुहैया करा रहे जरूरी सुविधाएं

Mon, 07 May 2018 11:40 PM IST
Updated Mon, 07 May 2018 11:40 PM IST
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मोटी फीस लेने के बाद भी बच्चों को नहीं मुहैया करा रहे जरूरी सुविधाएं
निजी विद्यालय संचालक मोटी फीस लेकर भी बच्चों को सुविधाएं मुहैया नहीं करा रहे। स्कूलों में आरटीई का पालन नहीं कराया जा रहा। उधर, शिक्षा सत्र के दूसरे माह में भी शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों की जांच नहीं कर सका है। जबकि विकल्प नहीं मिलने से अभिभावक भी बच्चों को ऐसे विद्यालयों में पढ़ाने को विवश हैं।
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जिले में 526 निजी स्कूल संचालित हैं। अधिकांश निजी स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों से मोटी फीस वसूली जा रही है, लेकिन फीस वसूलने के अनुपात में बच्चों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। कई स्कूलों में मानक के अनुरुप शिक्षकों की तैनाती होना तो दूर प्रशिक्षित शिक्षक तक नहीं हैं। शिक्षा सत्र का दूसरा माह चल रहा है, लेकिन अभी तक निजी स्कूलों में शिक्षकों के तैनाती का मानक सहित अन्य सुविधाओं की जांच तक नहीं की जा सकी है। अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से 345 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के सापेक्ष 102 गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को ही सील किया जा सका है। कई स्कूल संचालकों ने तो रि एडमिशन फीस भी वसूल किया है। यही नहीं स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलाई जा रही है। रैकवारडीह क्षेत्र के अभिभावक श्रीकांत सिंह, जर्नादन सिंह, शिवकुमार यादव, संजय यादव, नामवर पांडेय का कहना है कि भारी भरकम फीस वसूलने के बाद भी निजी स्कूलों में बच्चों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। मानक के अनुरुप शिक्षकों की तैनाती तक नहीं की जा सकी है।
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मधुबन्र। : तहसील क्षेत्र के मधुबन, मर्यादपुर, नंदौर, बेलौली, दुबारी, सुग्गीचौरी, दरगाह,गजियापुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों ऐसे निजी विद्यालय हैं जिसमें कुछ मान्यता प्राप्त भी हैं। अधिकांशत: गैर मान्यता प्राप्त स्कूल भी शामिल है। जो उच्च शिक्षा, अंग्रेजी माध्यम, एनसीईआरटी पैटर्न आदि का सब्जबाग दिखाकर अभिभावकों का खुले तौर पर शोषण कर रहे है। री-एडमिशन शुल्क, एडमिशन शुल्क, कापी, किताबें, स्पोर्ट्स, ड्रेस, जूते, बैग आदि के नाम पर खुलेआम पैसा लेकर अभिभावकों को लूट रहे हैं। अभिभावकों का कहना था कि री एडमिशन के नाम पर लिए जा रहे फीस पर रोक के साथ कहीं से भी किताबें लेने की आजादी हो। खंड शिक्षा अधिकारी गोपालशरण मिश्र का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं आया है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।
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कोट
दूसरे चरण में निजी स्कूलों में खेल मैदान, फीस सहित विभिन्न सुविधाओं के मानकों की जांच की जाएगी। जांच में गड़बड़ी मिलने पर स्कूल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ओपी त्रिपाठी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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