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कैबिनेट मंत्री ने किया समूहन भ्राम्यमान नाट्य समारोह का शुभारंभ
Updated Fri, 19 Jan 2018 12:41 AM IST
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मऊ। नगर स्थित हिंदी भवन के सभागार में जनपद की कला संस्कृति के क्षेत्र में एक नए आयाम की शुरूआत समूहन भ्राम्यमान नाट्य समारोह के शुभारंभ से हो गई। इस आयोजन को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से समूहन कला संस्थान द्वारा हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वन एवं पर्यावरण मंत्री दारासिंह चौहान ने किया। इस दौरान नाटक विदाई के जरिए दहेज जैसे कुरीति के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया गया।
समारोह की इस प्रथम संध्या पर एंबियांस के मंच से साधना सोनकर एवं साथियों ने राजस्थानी संगीत की जोरदार प्रस्तुति दी। उसके बाद राजकुमार शाह के सशक्त निर्देशन में नाटक विदाई का मंचन हुआ जो गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी के आधारित है, यह एक सर्वकालिक समस्या पर आधारित है। रचनागत स्तर पर इसकी अभिव्यक्ति प्रत्येक काल खंड में एक सी ही गहराई के साथ अभिव्यक्त होती रही है। विदाई शीर्षक के अर्थ बडे़ गूढ़ हैं। गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने निरूपमा की विदाई के साथ समाज में चली आ रही प्राचीन परंपरा को निभाया जरूर है, किन्तु विवाह मंडप में दहेज के लिए अडे़ अपने बाप से अनुराग का विद्रोह प्रतीकात्मक रूप में युवाओं से इस कुरीति के खिलाफ उठकर खड़े होने का संदेश भी देती है। संभवत: गुरूदेव ने अपनी दिव्य दृष्टि से जान लिया था कि केवल युवा सोच ही इन कुरीतियों के खिलाफ अचूक अस्त्र है। मंच पर नवीन चंद्रा ने रामसुंदर की और अर्पिता मिश्रा ने लीला की भूमिका को जीवंत कर दिया। शिवेंद्र राय ने रायबहादुर, अरित्रा सिंह ने चंचला, दिव्या सिंह ने निरूपमा, शुभो घोष ने किशोर की भूमिका में प्रभावित किया। इसके पूर्व अमीरचंद राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संस्कार भारती, प्रकाश बिंदु जिलाधिकारी दिनेश नन्दन राय भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं डॉ. श्रीनाथ खत्री पूर्व अध्यक्ष हिन्दी साहित्य परिषद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन करके किया। सुशील कुमार अग्रवाल, विनय जायसवाल, नंद किशोर थरड़, त्रिवेणी सर्राफ, अजय कुमार अग्रवाल, विजय जैन, उमाशंकर गुप्ता आदि ने आगत अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।
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समारोह की इस प्रथम संध्या पर एंबियांस के मंच से साधना सोनकर एवं साथियों ने राजस्थानी संगीत की जोरदार प्रस्तुति दी। उसके बाद राजकुमार शाह के सशक्त निर्देशन में नाटक विदाई का मंचन हुआ जो गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी के आधारित है, यह एक सर्वकालिक समस्या पर आधारित है। रचनागत स्तर पर इसकी अभिव्यक्ति प्रत्येक काल खंड में एक सी ही गहराई के साथ अभिव्यक्त होती रही है। विदाई शीर्षक के अर्थ बडे़ गूढ़ हैं। गुरूदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने निरूपमा की विदाई के साथ समाज में चली आ रही प्राचीन परंपरा को निभाया जरूर है, किन्तु विवाह मंडप में दहेज के लिए अडे़ अपने बाप से अनुराग का विद्रोह प्रतीकात्मक रूप में युवाओं से इस कुरीति के खिलाफ उठकर खड़े होने का संदेश भी देती है। संभवत: गुरूदेव ने अपनी दिव्य दृष्टि से जान लिया था कि केवल युवा सोच ही इन कुरीतियों के खिलाफ अचूक अस्त्र है। मंच पर नवीन चंद्रा ने रामसुंदर की और अर्पिता मिश्रा ने लीला की भूमिका को जीवंत कर दिया। शिवेंद्र राय ने रायबहादुर, अरित्रा सिंह ने चंचला, दिव्या सिंह ने निरूपमा, शुभो घोष ने किशोर की भूमिका में प्रभावित किया। इसके पूर्व अमीरचंद राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संस्कार भारती, प्रकाश बिंदु जिलाधिकारी दिनेश नन्दन राय भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं डॉ. श्रीनाथ खत्री पूर्व अध्यक्ष हिन्दी साहित्य परिषद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन करके किया। सुशील कुमार अग्रवाल, विनय जायसवाल, नंद किशोर थरड़, त्रिवेणी सर्राफ, अजय कुमार अग्रवाल, विजय जैन, उमाशंकर गुप्ता आदि ने आगत अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।
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