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मंत्री को ज्ञापन सौंप मेले को सरकारी कार्यक्रम के तहत घोषित कराने की मांग
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:59 PM IST
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दोहरीघाट। दो हरियों के मिलने होने पर पावन भूमि का नाम दोहरीघाट पड़ा। इसके चलते कार्तिक पूर्णिमा यहां पर स्नान का काफी फलदायी मान्यता है। इस अवसर पर लगने वाले पौराणिक मेले को बलिया जनपद के ददरी मेले की तर्ज पर सरकारी मेला आयोजन घोषित कराने की मांग करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को पत्रक सौंपा।
प्रतिनिधि मंडल में जिला अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता के साथ अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे। जिलाध्यक्ष ने बताया कि दोहरीघाट उत्तर वाहिनी सरयू के तट पर आदि काल से बसे दोहरीघाट और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां लगने वाले पैराणिक और ऐतिहासिक स्नान मेला को सरकारी करने की मांग किया गया है। बोले इस मेले का पूर्वांचल के हिंदू श्रद्वालुओं में काफी मान्यता है। इसके साथ ही यह स्थल आस्था का केंद्र है, इस मेले में कई जिले से लाखों की संख्या में लोग आते है। लेकिन यहां पर केवल राम जानकी घाट को छोड बाकी घाट घाघरा के उफान में विलीन हो चुकें हैं। ऐसे में श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर स्नान के लिये बाध्य होते है। इसके अलावा मंदिर और धर्मशालाओं के नदी मे कट कर विलीन होने से श्रद्वालुओ के सामने संकट उत्तपन्न हो गया है। इसके चलते प्रदेश सरकार से यह मांग की गई है। पत्रक लेने के बाद कैबिनेट मंत्री ने प्रतिनिधी मंडल को आश्वासन दिया कि इस मामले को संस्कृत मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा। प्रयास सार्थक हुआ तो यह मेला सरकारी होगा। प्रतिनिमंडल में संतोष राय, नंहे शाही, सुबाष मौर्या, सुरेश उपाध्याय, श्रीकांत जोगी सोनकर, विकाश वर्मा, अमिचंद, अन्नत लाल, प्रह्लाद, जनक चौधरी, सोमनाथ वर्मा, मनोहर जयसवाल, पप्पु गुप्ता, राम सनेही यादव, उमेश यादव, मो. कैफ, कहैंया राय, दिलिप वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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प्रतिनिधि मंडल में जिला अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता के साथ अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे। जिलाध्यक्ष ने बताया कि दोहरीघाट उत्तर वाहिनी सरयू के तट पर आदि काल से बसे दोहरीघाट और कार्तिक पूर्णिमा पर यहां लगने वाले पैराणिक और ऐतिहासिक स्नान मेला को सरकारी करने की मांग किया गया है। बोले इस मेले का पूर्वांचल के हिंदू श्रद्वालुओं में काफी मान्यता है। इसके साथ ही यह स्थल आस्था का केंद्र है, इस मेले में कई जिले से लाखों की संख्या में लोग आते है। लेकिन यहां पर केवल राम जानकी घाट को छोड बाकी घाट घाघरा के उफान में विलीन हो चुकें हैं। ऐसे में श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर स्नान के लिये बाध्य होते है। इसके अलावा मंदिर और धर्मशालाओं के नदी मे कट कर विलीन होने से श्रद्वालुओ के सामने संकट उत्तपन्न हो गया है। इसके चलते प्रदेश सरकार से यह मांग की गई है। पत्रक लेने के बाद कैबिनेट मंत्री ने प्रतिनिधी मंडल को आश्वासन दिया कि इस मामले को संस्कृत मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा। प्रयास सार्थक हुआ तो यह मेला सरकारी होगा। प्रतिनिमंडल में संतोष राय, नंहे शाही, सुबाष मौर्या, सुरेश उपाध्याय, श्रीकांत जोगी सोनकर, विकाश वर्मा, अमिचंद, अन्नत लाल, प्रह्लाद, जनक चौधरी, सोमनाथ वर्मा, मनोहर जयसवाल, पप्पु गुप्ता, राम सनेही यादव, उमेश यादव, मो. कैफ, कहैंया राय, दिलिप वर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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