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जिला अस्पताल सहित सीएचसी-पीएचसी से नदारद है रैबिज इंजेक्शन
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मऊ। यदि किसी को कुत्ते या बंदरों ने काट लिया है, तो सरकारी अस्पताल बिल्कुल मत जाइए। क्योंकि, जिला अस्पताल सहित जिले के सभी सीएचसी-पीएचसी में पिछले चार दिनों से एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। रोजाना 40 से अधिक मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। जिससे बाजार से वैक्सीन खरीदने में असमर्थ मरीजों को बेहद परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल में गुरुवार दोपहर 1 बजे तक 40 मरीज रेबीज इंजेक्शन न होने के चलते बैैरंग लौट गए। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने बताया कि रैबिज का इंजेक्शन पिछले चार दिनों से खत्म है। जिससे रोजाना 40 से 50 मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। वहीं घोसी के पिढ़वल से आए मनोज ने बताया उसके बेटे को मंगलवार को एक कुत्ते ने काट लिया। घोसी सीएचसी आने पर रेबीज इंजेक्शन न होने की बात कहकर उसे जिला अस्पताल भेजा गया। यहां आने पर यहां भी इंजेक्शन नहीं मिला।
वहीं नगर के डोमनपुरा के रामनरेश ने इंजेक्शन न मिलने पर बाहर से इंजेक्शन खरीदने की बात कही। वहीं रतनपुरा से आए महेश ने रतनपुरा सीएचसी में इंजेक्शन न होने पर जिला अस्पताल में भी नाउम्मीदी हाथ लगी। ऐसे में मेडिकल स्टोर संचालक 1200 से 1800 रुपये में वैक्सीन बेच रहे हैं। हैरत की बात ये है कि अधिकृत कंपनी से वैक्सीन की सप्लाई न होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग लोकल खरीद करने को तैयार नहीं। जबकि, हर साल करोड़ों रुपये की लोकल खरीद होती है। इस बाबत सीएमएस डॉ. बृजकुमार का कहना है कि रेबीज वैक्सीन के लिए पत्र भेजा जा चुका है।
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सीएचसी-पीएचसी से भी नदारद है इंजेक्शन
मऊ। जिले के कोपागंज, परदहा, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, दोहरीघाट, फतेहपुर मंडाव, बड़राव और रतनपुरा सीएचसी में पिछले चार दिनों से रैबिज नहीं है। इसके अलावा जिले के सभी 38 पीएचसी में रैबिज इंजेक्शन का अभाव बना हुआ है।
मऊ। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में साल में एक लाख से ज्यादा इंजेक्शन लगाया जाता है। जिसमें सदर तहसील के अलावा मुहम्मदाबाद, मधुबन और घोसी तहसील के मरीज आते है। जबकि इन क्षेत्रों में सीएचसी-पीएचसी में रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक होने का दावा सीएमओ कार्यालय द्वारा किया जाता है। सिर्फ सदर तहसील के मरीजों की संख्या केवल 30 फीसदी होती है। बाकी मरीज दूसरे तहसील क्षेत्र और बाहरी होते है।
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जिला अस्पताल में गुरुवार दोपहर 1 बजे तक 40 मरीज रेबीज इंजेक्शन न होने के चलते बैैरंग लौट गए। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी ने बताया कि रैबिज का इंजेक्शन पिछले चार दिनों से खत्म है। जिससे रोजाना 40 से 50 मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। वहीं घोसी के पिढ़वल से आए मनोज ने बताया उसके बेटे को मंगलवार को एक कुत्ते ने काट लिया। घोसी सीएचसी आने पर रेबीज इंजेक्शन न होने की बात कहकर उसे जिला अस्पताल भेजा गया। यहां आने पर यहां भी इंजेक्शन नहीं मिला।
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वहीं नगर के डोमनपुरा के रामनरेश ने इंजेक्शन न मिलने पर बाहर से इंजेक्शन खरीदने की बात कही। वहीं रतनपुरा से आए महेश ने रतनपुरा सीएचसी में इंजेक्शन न होने पर जिला अस्पताल में भी नाउम्मीदी हाथ लगी। ऐसे में मेडिकल स्टोर संचालक 1200 से 1800 रुपये में वैक्सीन बेच रहे हैं। हैरत की बात ये है कि अधिकृत कंपनी से वैक्सीन की सप्लाई न होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग लोकल खरीद करने को तैयार नहीं। जबकि, हर साल करोड़ों रुपये की लोकल खरीद होती है। इस बाबत सीएमएस डॉ. बृजकुमार का कहना है कि रेबीज वैक्सीन के लिए पत्र भेजा जा चुका है।
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सीएचसी-पीएचसी से भी नदारद है इंजेक्शन
मऊ। जिले के कोपागंज, परदहा, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, दोहरीघाट, फतेहपुर मंडाव, बड़राव और रतनपुरा सीएचसी में पिछले चार दिनों से रैबिज नहीं है। इसके अलावा जिले के सभी 38 पीएचसी में रैबिज इंजेक्शन का अभाव बना हुआ है।
मऊ। सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में साल में एक लाख से ज्यादा इंजेक्शन लगाया जाता है। जिसमें सदर तहसील के अलावा मुहम्मदाबाद, मधुबन और घोसी तहसील के मरीज आते है। जबकि इन क्षेत्रों में सीएचसी-पीएचसी में रैबिज इंजेक्शन का स्टॉक होने का दावा सीएमओ कार्यालय द्वारा किया जाता है। सिर्फ सदर तहसील के मरीजों की संख्या केवल 30 फीसदी होती है। बाकी मरीज दूसरे तहसील क्षेत्र और बाहरी होते है।