{"_id":"5bba3c21867a55687d7b5f57","slug":"161538931745-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्वजों को लोग आज करेंगे पिंडदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्वजों को लोग आज करेंगे पिंडदान
Updated Sun, 07 Oct 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। पूर्वजों को स्मरण करने का पर्व पितृ विसर्जन सोमवार को परंपरागत तरीके से मनाया जाएगा। मान्यता के अनुरूप अपने स्वर्गवासी पूर्वजों को पिंडदान व जल अर्पित कर पूजन अर्चन किया जाएगा। जबकि ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ-साथ उन्हें दान भी किया जाएगा। इस दौरान नदी तट, पवित्र पोखरों सहित अन्य स्थानों पर साफ सफाई की गई।
इस मौके पर कुश्ती प्रतियोगिता सहित परंपरागत खेलों का आयोजन किया गया है।
अश्विन मास के 15 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाता है। इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों का श्राद्घ करते हैं।पितृ पक्ष में पितृ पूजा के लिए पूरे 15 दिन तर्पण कर्मकांड के दौरान स्वर्गवासी पूर्वजों के सम्मान में जल अर्पित किया जाता है। पितृ विसर्जन के दिन नदी, तालाब तट पर एकत्रित होकर लोग सामूहिक रूप से तर्पण करते हैं।
शहर के तमसा तट स्थित ढेकुलियाघाट, बम घाट, सत्तीघाट, हनुमान घाट, रामघाट, संगत घाट व ब्रह्मस्थान पोखरे पर पर लोगों ने साफ सफाई किया। सोमवार को विधि विधान से अपने स्वर्गवासी पूर्वजों को पिंडदान व जल अर्पित कर पूजन अर्चन करेंगे। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के बहरीपुर, डुमरांव, बढ़ुआगोदाम, कहिनौर, उस्मानपुर, सुअराबोझ, रैकवारडीह सहित विभिन्न इलाकों में पितृ विसर्जन को परंपरागत ढंग से मनाने की तैयारी पूरी कर ली गई। साथ ही पोखरों की साफ सफाई की गई। ग्रामीण इलाकों में कुश्ती प्रतियोगिता सहित परंपरागत खेलों का आयोजन किया गया है।
विज्ञापन
मुहम्मदाबादगोहना कस्बा निवासी पं. विरेंद्र शुक्ल ने बताया कि सोमवार को पूर्वाह्न 10.47 तक चतुर्दशी रहेगी। इसके बाद अमावश्या लग जाएगी। जो मंगलवार को पूर्वाह्न 9.10 तक रहेगी। पितृों के निमित्त पिंडदान, तर्पण व श्राद्ध आदि कर्म मध्याह्न काल में किए जाते हैं। ऐसे में सोमवार को ही पितृ विसर्जन का पर्व मनाया जाएगा।
पौराणिक और धार्मिक नगरी दोहरीघाट को कभी घाटों का घाट बोला जाता था, आज उसका आस्तित्व अंतिम सांसें गिन रहा है। कसबे के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन सहित प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन आज तक सुधि नहीं ली जा सकी है। ऐसे में लोग बदहाल हो चुुके घाटो पर कैसे पिंडदान करेंगे। मान्यता के अनुसार, सरयू नदी तट स्थित प्रसिद्ध रामघाट पर त्रेतायुग में भगवान राम ने विश्राम किया था जिस पर इसका नाम रामघाट रखा गया था। वर्तमान में घाट स्नान करने योग्य नहीं रह गए हैं। इसके अलावा जानकी घाट और गौरीशंकर घाट पर भी गंदगी है। कस्बे के महेंद्र, सुरेंद्र, राजकुमार, गंगा, सुरेश ने घाटों का सुंदरीकरण कराने के साथ ही स्वच्छ बनाए जाने की मांग की है। नगर पंचायत चेयरमैन वेदाना सोनकर का कहना है कि घाटों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही मरम्मत कार्य कराया जाएगा। हालांकि घाटों पर बराबर साफ सफाई कराई जाती है।
विज्ञापन
इस मौके पर कुश्ती प्रतियोगिता सहित परंपरागत खेलों का आयोजन किया गया है।
अश्विन मास के 15 दिनों को पितृ पक्ष कहा जाता है। इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों का श्राद्घ करते हैं।पितृ पक्ष में पितृ पूजा के लिए पूरे 15 दिन तर्पण कर्मकांड के दौरान स्वर्गवासी पूर्वजों के सम्मान में जल अर्पित किया जाता है। पितृ विसर्जन के दिन नदी, तालाब तट पर एकत्रित होकर लोग सामूहिक रूप से तर्पण करते हैं।
विज्ञापन
शहर के तमसा तट स्थित ढेकुलियाघाट, बम घाट, सत्तीघाट, हनुमान घाट, रामघाट, संगत घाट व ब्रह्मस्थान पोखरे पर पर लोगों ने साफ सफाई किया। सोमवार को विधि विधान से अपने स्वर्गवासी पूर्वजों को पिंडदान व जल अर्पित कर पूजन अर्चन करेंगे। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के बहरीपुर, डुमरांव, बढ़ुआगोदाम, कहिनौर, उस्मानपुर, सुअराबोझ, रैकवारडीह सहित विभिन्न इलाकों में पितृ विसर्जन को परंपरागत ढंग से मनाने की तैयारी पूरी कर ली गई। साथ ही पोखरों की साफ सफाई की गई। ग्रामीण इलाकों में कुश्ती प्रतियोगिता सहित परंपरागत खेलों का आयोजन किया गया है।
विज्ञापन
मुहम्मदाबादगोहना कस्बा निवासी पं. विरेंद्र शुक्ल ने बताया कि सोमवार को पूर्वाह्न 10.47 तक चतुर्दशी रहेगी। इसके बाद अमावश्या लग जाएगी। जो मंगलवार को पूर्वाह्न 9.10 तक रहेगी। पितृों के निमित्त पिंडदान, तर्पण व श्राद्ध आदि कर्म मध्याह्न काल में किए जाते हैं। ऐसे में सोमवार को ही पितृ विसर्जन का पर्व मनाया जाएगा।
पौराणिक और धार्मिक नगरी दोहरीघाट को कभी घाटों का घाट बोला जाता था, आज उसका आस्तित्व अंतिम सांसें गिन रहा है। कसबे के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन सहित प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन आज तक सुधि नहीं ली जा सकी है। ऐसे में लोग बदहाल हो चुुके घाटो पर कैसे पिंडदान करेंगे। मान्यता के अनुसार, सरयू नदी तट स्थित प्रसिद्ध रामघाट पर त्रेतायुग में भगवान राम ने विश्राम किया था जिस पर इसका नाम रामघाट रखा गया था। वर्तमान में घाट स्नान करने योग्य नहीं रह गए हैं। इसके अलावा जानकी घाट और गौरीशंकर घाट पर भी गंदगी है। कस्बे के महेंद्र, सुरेंद्र, राजकुमार, गंगा, सुरेश ने घाटों का सुंदरीकरण कराने के साथ ही स्वच्छ बनाए जाने की मांग की है। नगर पंचायत चेयरमैन वेदाना सोनकर का कहना है कि घाटों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही मरम्मत कार्य कराया जाएगा। हालांकि घाटों पर बराबर साफ सफाई कराई जाती है।