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श्रद्धालुओं ने गाजे बाजे के साथ निकाला कलश यात्रा जुलूस
Updated Mon, 29 Oct 2018 10:16 PM IST
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रतनपुरा विकास खंड क्षेत्र के जमालपुर बुलंद बजरंगबली पोखरा पर आयोजित पांच दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा एवं हनुमत महायज्ञ प्राण प्रतिष्ठा के क्रम में श्रद्धालुुुओं ने सोमवार को गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाला। कलया यात्रा में शामिल भक्तों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।
कलश यात्रा में शामिल कुंवारी कन्याएं तथा महिलाएं मंगलगीत गाते हुए चल रही थीं। प्रयागराज से पधारे देवाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में निकली कलश यात्रा जुलूस मेें शामिल श्रद्धालुओं का हुजूम मालपुर बुलंद पोखरे से चलकर जमालपुर बुलंद गांव होते हुए पहसामोहिद्दीनपुर होते हुए भूथरिया बाबा के पोखरा पहुंचा। वहां से कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद जुलूस मधुवारी मार्ग पर होते हुए जमालपुरबुलंद पोखरे पहुंची। जहां देवाचार्य जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हनुमानजी की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा करवाया। इस मौके पर देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि महायज्ञ में भावभरी आहुतियां देने से एक तरफ जहां व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं दूसरी तरफ समाज में आपसी सौहार्द व भाईचारा की भावना का विकास होता है। इस महायज्ञ से एक तरफ जहां मानव के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है। कलश यात्रा जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में रामपरीखा यादव, जवाहर गोड़, नरायण, रामदीन, अनिल, श्रीराम यादव आदि का योगदान रहा।
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कलश यात्रा में शामिल कुंवारी कन्याएं तथा महिलाएं मंगलगीत गाते हुए चल रही थीं। प्रयागराज से पधारे देवाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में निकली कलश यात्रा जुलूस मेें शामिल श्रद्धालुओं का हुजूम मालपुर बुलंद पोखरे से चलकर जमालपुर बुलंद गांव होते हुए पहसामोहिद्दीनपुर होते हुए भूथरिया बाबा के पोखरा पहुंचा। वहां से कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद जुलूस मधुवारी मार्ग पर होते हुए जमालपुरबुलंद पोखरे पहुंची। जहां देवाचार्य जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हनुमानजी की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा करवाया। इस मौके पर देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि महायज्ञ में भावभरी आहुतियां देने से एक तरफ जहां व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं दूसरी तरफ समाज में आपसी सौहार्द व भाईचारा की भावना का विकास होता है। इस महायज्ञ से एक तरफ जहां मानव के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है। कलश यात्रा जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में रामपरीखा यादव, जवाहर गोड़, नरायण, रामदीन, अनिल, श्रीराम यादव आदि का योगदान रहा।
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