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नहीं चालू हो सका नया पोस्टमार्टम हाउस
Updated Sun, 07 Oct 2018 10:32 PM IST
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मऊ। जिला अस्पताल परिसर में बना दो मंजिला आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस चार साल बाद भी चालू नहीं किया जा सका। कारण, बजट के अभाव में अभी यहां शव विच्छेदन उपकरण नहीं लगाए जा सके हैं। नतीजतन, अभी तक पोस्टमार्टम का कार्य पुराने और जर्जर पीएम आवास में ही हो रहा है।
शासन की स्वीकृति के बाद जिले में नये पोस्टमार्टम हाउस के लिए 52 लाख रुपयों का बजट वर्ष 2014-15 में जारी किया गया था। निमार्ण कार्य का दायित्व यूपीपीसीएल को दिया गया। कार्यदायी संस्था ने दो मंजिला भवन में चैनल गेट, दरवाजे, बिजली फिटिंग, टाइल्स, मुजैक सहित रंग रोगन करके कार्यदायी संस्था ने भवन को पूरी तरह से निर्मित करा दिया। भवन पूर्णतया वातानुकूलित है। बजट के अभाव में अभी तक यहां उपकरण आदि नहीं लगाए गए हैं। जिसके चलते शव विच्छेदन का कार्य भी यहां शुरू नहीं हो सका है। केवल भवन के सामने मिट्टी पाटकर छोटी सी चहारदीवारी बनाना बाकी है। विभागीय उपेक्षा से यह भवन पिछले चार साल से यूहीं पड़ा हुआ है। वर्तमान में पोस्टमार्टम का कार्य पुराने जर्जर हो चुके भवन में ही चल रहा है। यहां माहभर में करीब 50 शव आते हैं। जर्जर भवन बरसात में टपकता है। पोस्टमार्टम के दौरान जटिल केसों में मृतकों के विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिए जाते हैं। इन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजा जाता है। विसरा वाले डिब्बों पर उनके नाम पते, दिनांक आदि विवरण लिखी परचियां चस्पा की गई रहती हैं। लेकिन पानी टपकने से ये पर्चियां भींग कर नष्ट हो जाती हैं और कौन डिब्बा किस मृतक का है, इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसा पिछले सालों में हो चुका है। इसके बावजूद विभाग संवेदनहीन बना हुआ है।
इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एससी सिंह ने बताया कि नए पोस्टमार्टम हाउस की बाउंड्रीवाल और गेट लगाने का काम बाकी है। इसके पूरा हो जाने के बाद नये भवन में पोस्टमार्टम का कार्य शुरु करा दिया जाएगा। कब तक होगा निर्माण और कब शुरू होगा नए भवन में पोस्टमार्टम का काम पूछे जाने पर सीएमएस चुप्पी साध लिए।
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शासन की स्वीकृति के बाद जिले में नये पोस्टमार्टम हाउस के लिए 52 लाख रुपयों का बजट वर्ष 2014-15 में जारी किया गया था। निमार्ण कार्य का दायित्व यूपीपीसीएल को दिया गया। कार्यदायी संस्था ने दो मंजिला भवन में चैनल गेट, दरवाजे, बिजली फिटिंग, टाइल्स, मुजैक सहित रंग रोगन करके कार्यदायी संस्था ने भवन को पूरी तरह से निर्मित करा दिया। भवन पूर्णतया वातानुकूलित है। बजट के अभाव में अभी तक यहां उपकरण आदि नहीं लगाए गए हैं। जिसके चलते शव विच्छेदन का कार्य भी यहां शुरू नहीं हो सका है। केवल भवन के सामने मिट्टी पाटकर छोटी सी चहारदीवारी बनाना बाकी है। विभागीय उपेक्षा से यह भवन पिछले चार साल से यूहीं पड़ा हुआ है। वर्तमान में पोस्टमार्टम का कार्य पुराने जर्जर हो चुके भवन में ही चल रहा है। यहां माहभर में करीब 50 शव आते हैं। जर्जर भवन बरसात में टपकता है। पोस्टमार्टम के दौरान जटिल केसों में मृतकों के विसरा जांच के लिए सुरक्षित रख लिए जाते हैं। इन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला में भेजा जाता है। विसरा वाले डिब्बों पर उनके नाम पते, दिनांक आदि विवरण लिखी परचियां चस्पा की गई रहती हैं। लेकिन पानी टपकने से ये पर्चियां भींग कर नष्ट हो जाती हैं और कौन डिब्बा किस मृतक का है, इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसा पिछले सालों में हो चुका है। इसके बावजूद विभाग संवेदनहीन बना हुआ है।
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इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एससी सिंह ने बताया कि नए पोस्टमार्टम हाउस की बाउंड्रीवाल और गेट लगाने का काम बाकी है। इसके पूरा हो जाने के बाद नये भवन में पोस्टमार्टम का कार्य शुरु करा दिया जाएगा। कब तक होगा निर्माण और कब शुरू होगा नए भवन में पोस्टमार्टम का काम पूछे जाने पर सीएमएस चुप्पी साध लिए।
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