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हिंदू धर्म में मोक्ष सबसे बड़ा लक्ष्य -मनीष आर्य
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मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है। यह प्रवचन रतनपुरा में आयोजित शुद्धीकरण यज्ञ में बाल ब्रह्मचारी आर्य समाजी मनीष आर्य ने दी।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में मृत्यु को सबसे बड़ा सत्य माना गया है। हिंदू धर्म के अनुसार जिस जीव ने इस संसार में जन्म लिया है ,उसका मरना तय है। लेकिन साथ ही हिंदू धर्म में आत्मा को अजर-अमर माना गया है। दरअसल इसके लिए हिंदू धर्म के उस दर्शन या तत्व को समझना जरूरी है जो आत्मा पर आधारित है। सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य हर जन्म में एक नया शरीर लेकर तो जन्म लेता है , लेकिन उसकी आत्मा नई नहीं होती। आत्मा अपने पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार नया जन्म और नए शरीर को धारण करती है। आत्मा कपड़ों की तरह शरीर बदल-बदल कर पृथ्वी लोक यानि कर्म लोक में आती है। आत्मा को बार-बार इस धरती पर अपने कर्म चक्र को पूरा करने के लिए ही जन्म लेना पड़ता है। यह यात्रा मोक्ष के बाद ही समाप्त होती है। इस कार्यक्रम में शिवपूजन प्रसाद, चंद्रमा प्रसाद गुप्त, श्याम बाबू गुप्त, राधा कृष्ण गुप्त, फतेह बहादुर गुप्त, ओम प्रकाश गुप्त, श्री कृष्ण प्रसाद गुप्त, धर्मावती देव, मनोज कुमार गुप्ता, ममता गुप्ता, अशोक कुमार गुप्त, शीला देवी, गीता देवी, सविता देवी, राम लक्ष्मण प्रसाद, बाबूराम गुप्ता, शंकर गुप्ता, राम अवध गुप्ता, शिव वचन गुप्ता, मनोज कुमार गुप्ता सहित आदि लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में मृत्यु को सबसे बड़ा सत्य माना गया है। हिंदू धर्म के अनुसार जिस जीव ने इस संसार में जन्म लिया है ,उसका मरना तय है। लेकिन साथ ही हिंदू धर्म में आत्मा को अजर-अमर माना गया है। दरअसल इसके लिए हिंदू धर्म के उस दर्शन या तत्व को समझना जरूरी है जो आत्मा पर आधारित है। सनातन धर्म के अनुसार मनुष्य हर जन्म में एक नया शरीर लेकर तो जन्म लेता है , लेकिन उसकी आत्मा नई नहीं होती। आत्मा अपने पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार नया जन्म और नए शरीर को धारण करती है। आत्मा कपड़ों की तरह शरीर बदल-बदल कर पृथ्वी लोक यानि कर्म लोक में आती है। आत्मा को बार-बार इस धरती पर अपने कर्म चक्र को पूरा करने के लिए ही जन्म लेना पड़ता है। यह यात्रा मोक्ष के बाद ही समाप्त होती है। इस कार्यक्रम में शिवपूजन प्रसाद, चंद्रमा प्रसाद गुप्त, श्याम बाबू गुप्त, राधा कृष्ण गुप्त, फतेह बहादुर गुप्त, ओम प्रकाश गुप्त, श्री कृष्ण प्रसाद गुप्त, धर्मावती देव, मनोज कुमार गुप्ता, ममता गुप्ता, अशोक कुमार गुप्त, शीला देवी, गीता देवी, सविता देवी, राम लक्ष्मण प्रसाद, बाबूराम गुप्ता, शंकर गुप्ता, राम अवध गुप्ता, शिव वचन गुप्ता, मनोज कुमार गुप्ता सहित आदि लोग मौजूद रहे।
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