{"_id":"5b843af442c7924633077922","slug":"141535392500-mau-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदहाल पड़ा है राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदहाल पड़ा है राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:29 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहसा बाजार स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बदहाल पड़ा है। यहां बिजली, पेयजल सहित अन्य सुविधाओं का अभाव है। अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। चिकित्सक न होने से मरीजों का उपचार फार्मासिस्ट द्वारा किया जा रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के आला अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
रतनपुरा विकास खंड क्षेत्र के पहसा बाजार में जब राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना कराई गई तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। वहीं पिछले कई साल से अस्पताल में चिकित्सकों की कमी हैं। अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। यहीं नहीं भवन भी जर्जर हो गया हैं। स्वास्थ्य कर्मी अंदर बैठने से कतराते हैं। परिसर में हैंडपंप तो लगा है, लेकिन प्रदूषित पानी उगल रहा है। जरूरी दवाओं का अकाल रहता है। इस संबंध में स्थानीय अशोक तिवारी, भगेदू यादव, गुलाब सिंह, संदीप कुमार, भोला आदि का कहना हैं कि कई बार इस संबंध में कई बार आला अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन अस्पताल में न तो चिकित्सकों की तैनाती की गई न ही व्याप्त असुविधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया।
विज्ञापन
रतनपुरा विकास खंड क्षेत्र के पहसा बाजार में जब राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना कराई गई तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की आस जगी, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। वहीं पिछले कई साल से अस्पताल में चिकित्सकों की कमी हैं। अस्पताल फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। यहीं नहीं भवन भी जर्जर हो गया हैं। स्वास्थ्य कर्मी अंदर बैठने से कतराते हैं। परिसर में हैंडपंप तो लगा है, लेकिन प्रदूषित पानी उगल रहा है। जरूरी दवाओं का अकाल रहता है। इस संबंध में स्थानीय अशोक तिवारी, भगेदू यादव, गुलाब सिंह, संदीप कुमार, भोला आदि का कहना हैं कि कई बार इस संबंध में कई बार आला अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन अस्पताल में न तो चिकित्सकों की तैनाती की गई न ही व्याप्त असुविधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया।
विज्ञापन