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लाखों खर्च के बाद भी दुश्वारियां जस की तस

Sun, 25 Jun 2017 10:51 PM IST
Updated Sun, 25 Jun 2017 10:51 PM IST
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लाखों खर्च के बाद भी दुश्वारियां जस की तस
मऊ। सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए विभाग की तरफ से करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन विद्यालयों मेें सुविधाएं बहाल करने की दिशा में विभागीय अधिकारी उदासीन नजर आ रहे हैं। नया सत्र शुरू होने में सप्ताह भर से भी कम समय है लेकिन जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में पंखे तथा ट्यूबलाइट लगाना तो दूर विद्युतीकरण तक नहीं कराया जा सका है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से विद्यालयों में वायरिंग कराने के बाद भी अधिकांश विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को लंबे समय से पंखे की हवा मयस्सर नहीं हो पा रही है। किसी विद्यालय में वायरिंग उखड़ गई है तो कहीं पंखे व ट्यूबलाइट ही नदारद हैं। कुछेक स्कूलों में तो कागजों पर ही विद्युतीकरण करा दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी बिजली विभाग की ओर से बिजली कनेक्शन न देने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
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जनपद में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। नया शिक्षा सत्र एक जुलाई से शुरू होना है, लेकिन विभाग की तरफ से परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गर्मी व उमस से राहत दिलाने के लिए कोई तैयारी नहीं दिख रही है। शासन की तरफ से वर्ष 2007-08 में सभी परिषदीय विद्यालयों में विद्युतीकरण कराने का फरमान जारी किया गया था। प्रत्येक विद्यालय को विद्युतीकरण के मद में 25 हजार रुपया भी उपलब्ध कराया गया था। आनन फानन में तो महकमे की ओर से कागज पर विद्युतीकरण तो करा दिया गया। हालत यह रही कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से धन की बंदरबांट कर घटिया सामग्री लगा दी गई। नतीजा यह हुआ कि रख रखाव सही ढंग से न होने की वजह से कई विद्यालयों में बिजली की वायरिंग तक उखड़ गई। पंखा और ट्यूबलाइट तक नष्ट हो गए अथवा चोरी हो गए। कई स्कूलों के बिजली के केबिल चोर काट ले गए। हालत यह है कि कुछ विद्यालयों में बिजली की सुविधा है भी तो प्रधानाध्यापक चोरी के डर से अपने घर पर ही पंखा रखे हुए हैं। विभाग की तरफ से प्रतिवर्ष रखरखाव के नाम पर प्रत्येक विद्यालयों में पांच से सात हजार रुपया प्रबंध समिति के खाते में आता है। वह पैसा खर्च हो जाता है, लेकिन व्यवस्था जस की तस रहती है। इस बाबत मंडलीय सहायक निदेशक बेसिक डॉ. नंदलाल सिंह का कहना है कि शासन से बजट मिलने की उम्मीद है। विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास जारी है।
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97 फीसदी विद्यालयों में पंखा है न ट्यूबलाइट
मधुबन। फतेहपुर मंड़ाव ब्लाक क्षेत्र में 143 प्राथमिक तथा 43 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। लगभग 97 फीसदी विद्यालयों में बिजली की सुविधा नहीं है। बच्चों को प्रतिवर्ष गर्मी व उमस के बीच पढ़ाई करना पड़ता है। हालांकि यहां फाइलों में सब कुछ ओके चल रहा है। यह तो एक बानगी है। यही स्थिति अन्य ब्लाक क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों की है।
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93 विद्यालयों में विद्युतीकरण का दावा
मऊ। दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्र में 118 प्राथमिक तथा 46 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बिजली की सुविधा बहाल नहीं की जा सकी है। दोहरीघाट बीआरसी के खंड शिक्षा अधिकारी गोपाल शरण मिश्र का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की तरफ से 93 विद्यालयों को बूथ बनाया गया था। वहीं बिजली सहित सभी व्यवस्था बहाल की गई थी। विद्यालय बंद हो जाने पर चोर केबिल काट ले जाते हैं। चोरी की भी घटना होती है।
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