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प्रचार प्रसार के अभाव में योजना के लाभ से वंचित हैं किसान
Updated Thu, 13 Dec 2018 12:15 AM IST
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मऊ। सरकार की तरफ से किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का व्यापक प्रचार प्रसार न होने और बीमा कंपनी का सहयोगात्मक रवैया न होने से किसानों को लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। तीन वर्ष में 2947 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी को 185.05 लाख प्रीमियम जमा किया। बीमा कंपनी ने वर्ष 2017 में खरीफ के समय 121 किसानों को 15.6 लाख का मुआवजा दिया है। इस वर्ष कम बारिश होने से किसानों को धान की फसल में काफी नुकसान हुआ है। मुआवजे के लिए विभागीय अधिकारियों से सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
पूरे जिले में 2.62 किसान पंजीकृत हैं। शासन की तरफ से फसल बीमा के लिए यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कं. लि. नामित की गई है। योजना का प्रचार प्रसार न होने तथा कंपनी के अधिकारियों के सहयोगात्मक रवैया न अपनाए जाने से काफी किसान योजना के लाभ से वंचित हो जा रहे हैं। वर्ष 2016 में 7908 किसानों ने 41.72 लाख प्रीमियम जमा किया था। वर्ष 2017 में 8563 किसानों ने 64.32 लाख प्रीमियम जमा किया था, लेकिन खरीफ सीजन का सिर्फ 121 किसानों को 15.6 लाख ही मुआवजा दिया गया। जबकि जिले में बारिश तथा ओला वृष्टि में गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इसी तरह वर्ष 2018 में 12776 किसानों ने 78.33 लाख जमा किया है। किसानों की माने तो कम बारिश होने से धान की फसल के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत कमी आई है। लेकिन मुआवजे के नाम पर एक पाई नहीं मिली है। यही नहीं जो किसान फसल बीमा योजना का लाभ लेना भी चाहते हैं न तो विभाग, न ही कंपनी और न ही बैंक सहयोग कर रहा है।
किसान बोले: नहीं सहयोग करते हैं बीमा कंपनी के अधिकारी
मऊ। प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने के बाद भी क्लेम लेने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, राकेश सिंह, राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के शिवाकांत सिंह का कहना है कि किसानों ने बीमा तो कराया है, लेकिन नुकसान के बाद क्लेम नहीं मिलता है। गत वर्ष तथा इस वर्ष भी प्राकृतिक आपदा से फसल का नुकसान हुआ, लेकिन कुछ नहीं मिला। कृषि विभाग, बैंक, बीमा कंपनी के उदासीनता से किसानों को फसल बीमा योजना के लिए पंजीकरण तक नहीं हो पा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि फसल बीमा के लिए शासन स्तर से यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कं. लि. नामित की गई है। किसानों की शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी। डीएम की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक तथा बीमा कंपनी के अधिकारियों के समक्ष ब्लाक स्तर पर फसल बीमा पंजीकरण कराने की सुविधा बहाल करने का मुद्दा उठाया गया था।
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पूरे जिले में 2.62 किसान पंजीकृत हैं। शासन की तरफ से फसल बीमा के लिए यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कं. लि. नामित की गई है। योजना का प्रचार प्रसार न होने तथा कंपनी के अधिकारियों के सहयोगात्मक रवैया न अपनाए जाने से काफी किसान योजना के लाभ से वंचित हो जा रहे हैं। वर्ष 2016 में 7908 किसानों ने 41.72 लाख प्रीमियम जमा किया था। वर्ष 2017 में 8563 किसानों ने 64.32 लाख प्रीमियम जमा किया था, लेकिन खरीफ सीजन का सिर्फ 121 किसानों को 15.6 लाख ही मुआवजा दिया गया। जबकि जिले में बारिश तथा ओला वृष्टि में गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था। इसी तरह वर्ष 2018 में 12776 किसानों ने 78.33 लाख जमा किया है। किसानों की माने तो कम बारिश होने से धान की फसल के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत कमी आई है। लेकिन मुआवजे के नाम पर एक पाई नहीं मिली है। यही नहीं जो किसान फसल बीमा योजना का लाभ लेना भी चाहते हैं न तो विभाग, न ही कंपनी और न ही बैंक सहयोग कर रहा है।
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किसान बोले: नहीं सहयोग करते हैं बीमा कंपनी के अधिकारी
मऊ। प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने के बाद भी क्लेम लेने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, राकेश सिंह, राष्ट्रीय लोकदल के जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह, कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के शिवाकांत सिंह का कहना है कि किसानों ने बीमा तो कराया है, लेकिन नुकसान के बाद क्लेम नहीं मिलता है। गत वर्ष तथा इस वर्ष भी प्राकृतिक आपदा से फसल का नुकसान हुआ, लेकिन कुछ नहीं मिला। कृषि विभाग, बैंक, बीमा कंपनी के उदासीनता से किसानों को फसल बीमा योजना के लिए पंजीकरण तक नहीं हो पा रहा है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि फसल बीमा के लिए शासन स्तर से यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कं. लि. नामित की गई है। किसानों की शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी। डीएम की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक तथा बीमा कंपनी के अधिकारियों के समक्ष ब्लाक स्तर पर फसल बीमा पंजीकरण कराने की सुविधा बहाल करने का मुद्दा उठाया गया था।