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ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता: पीके राय
Updated Thu, 22 Nov 2018 11:12 PM IST
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मऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्वाधान में महिला जिला अस्पताल के सभागार में चल रहे सात दिवसीय नवजात शिशु देखभाल सप्ताह कार्यशाला का समापन मंगलवार को किया गया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अपर चिकित्साधिकारी डा. पीके राय मौजूद रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि नवजात शिशु के साथ मातृत्व स्वास्थ्य एवं शिशु स्वास्थ्य पर भी काम करने की जरूरत है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई तरह के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। लेकिन कहीं न कहीं जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इससे वंचित हैं। कहा कि परिवार नियोजन पर ज्यादा फोकस करके काम करने की जरूरत है। तभी हम शिशु मृत्यु दर को कम कर सकते हैं। डीपीएम रविंद्रनाथ ने कहा कि बच्चों के जन्म से 28 दिनों का समय नवजात के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद 28 दिनों के अंदर शिशु की मृत्यु को ही नवजात शिशु मृत्यु कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चा बीमार पड़ता है, उसका सही समय पर इलाज करने से न्यूनेटल मोर्टिलिटी रेट को कम किया जा सकता है। इस मौके पर ममता यादव, रेनू आदि स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि नवजात शिशु के साथ मातृत्व स्वास्थ्य एवं शिशु स्वास्थ्य पर भी काम करने की जरूरत है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई तरह के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। लेकिन कहीं न कहीं जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इससे वंचित हैं। कहा कि परिवार नियोजन पर ज्यादा फोकस करके काम करने की जरूरत है। तभी हम शिशु मृत्यु दर को कम कर सकते हैं। डीपीएम रविंद्रनाथ ने कहा कि बच्चों के जन्म से 28 दिनों का समय नवजात के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद 28 दिनों के अंदर शिशु की मृत्यु को ही नवजात शिशु मृत्यु कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चा बीमार पड़ता है, उसका सही समय पर इलाज करने से न्यूनेटल मोर्टिलिटी रेट को कम किया जा सकता है। इस मौके पर ममता यादव, रेनू आदि स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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