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बायोगैस ट्रीटमेंट प्लांट के अभाव में बदहाल है अस्पताल का सीवर लाइन:
Updated Mon, 12 Feb 2018 11:17 PM IST
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मऊ। जिला अस्पताल के साथ आवासीय क्षेत्र में सीवरेज सिस्टम पूरी तरह फेल है।अस्पताल और कालोनी के निर्माण के समय शौचालयों से निकलने वाले मलवे को निस्तारित करने के लिए बायो गैस ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की व्यवस्था की गई थी। बकायदे पास हुए नक्शें में इसका जिक्र भी किया गया था। इसके कारण जिला अस्पताल और आवासों के शौचालय के लिए टैंक नहीं बनाए गए। कार्यदायी संस्था निर्माण निगम ने पहले ही सीवर पाइप बिछाकर कर एक बायोगैस प्लांट के निर्माण का कार्य शुरु किया था। सीवेज पाइप लेकिन किन्ही कारणों से काम रुक गया। जो दुबारा शुरू नहीं किया जा सका। बायोगैस ट्रिटमेंट प्लांट न होने से अस्पताल परिसर में ही निकलने वाली गंदगी फैलती है। लोगों का उपचार करने वाले अस्पताल में व्याप्त इस अव्यवस्था से एक तरफ जहां लोगों का जीना मुहाल है, वहीं यह अव्यवस्था से स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लग रहा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता कल्पनाथ राय के प्रयास से जिले में 100 बेड का जिला अस्पताल का निर्माण किया गया। अस्पताल के मुख्य भवन और अवासीय कालोनी के सभी श्रेणियों के 125 आवासों का निर्माण कराया गया । हालांकि इनमें कुछ आवास अब भी अधूरे हैं। चूंकि अस्पताल के नक्शे में अस्पताल के मुख्य भवन और आवासीय कालोनी में शौचालयों के लिए टैंकों का निर्माण नहीं कराया गया क्योंकि सभी शौचालयों का मलवा एक बड़े टैंक में एकत्र कर उससे बायोगैस संयंत्र की स्थापना का लक्ष्य रखा गया था। निर्मादायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने इसके लिए पूरे परिसर में सीवेज पाइप लाइन बिछा दिया। जगह जगह उसके केबिन बना दिए। केवल उन पाइपों को जोड़कर प्लांट का निर्माण का काम बाकी रह गया। इस बीच वर्ष 2000 में जिला अस्पताल का लोकार्पण हो गया। आधे अधूरे बने आवासीय भवनों को कर्मचारियों को आवंटित कर दिया गया। चूंकि बायोगैस प्लांट बनना था इसलिए इन आवासों के शौचालयों के लिए टैंक नहीं बनाए गए ।लेकिन बायोगैस प्लांट का काम रोक दिया गया। तब से यह रुका हुआ है। आवासीय कालोनी में आवासों के शौचालयों का मलवा आस पास बहता रहता है। इससे भीषण गंदगी फैलती है। लोगों का कहना है कि यदि बायोगैस प्लांट का काम पूरा करा दिया जाए तो गंदगी से तो निजात मिल ही जाती बिजली की खपत भी कम हो जाती । इस संबंध में सीएमएस डा. बृज कुमार कहते हैं कि वे इस संबंध में तत्कालीन नक्शें की जांच कराउंगा और महानिदेशालय को पत्र लिखकर बरायोगैस प्लांट का काम पूरा कराने का प्रयास करूंगा।
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