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रावण का अंत होते ही पंडाल में गूंजा जयश्रीराम
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:03 PM IST
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मऊ। रतनपुरा ब्लाक मुख्यालय के रतनपुरा बाजार स्थित नेहरु इंटर कालेज परिसर में चल रही रामलीला में लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध, रावण वध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। कुंभकरण, रावण वध होते ही जयश्रीराम के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा।
रामलीला में मेघनाद के बाण चलाने पर लक्ष्मण के मूर्छित हो जाने पर दर्शकों की आंखे नम हो गई। वहीं सुषेन वैद्य द्वारा बूटी पिलाते ही लक्ष्मण उठ जाते हैं। लक्ष्मण के जीवित होते ही जयकारे से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद कुंभकरण का वध का मंचन किया गया। वध होते ही दर्शकों ने जयश्रीराम का उद्घोष किया। इसी दौरान अहिरावण राम लक्ष्मण को चुरा लाता है। तब हनुमान जी पाताल लोक से उन्हें मुक्त कराते हैं। इसके बाद राम रावण का युद्ध होता है। विभीषण के बताने पर भगवान श्रीराम रावण की नाभि पर तीर मारकर रावण का वध कर देते हैं। रावण का अंत होते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से वातावरण गंज उठा। रामलीला मंचन को सफल बनाने में सुरेंद्र नाथ शर्मा, अरूण बंगा, अंगद गोड, प्रदीप शर्मा, लखीचंद शर्मा, अमरजीत गोड़, मनोज कुमार गुप्ता, रामलीला के संरक्षक उमाशंकर सिंह, व्यवस्थापक मनोज कुमार गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, राजूलाल, आनन्द खरवार आदि का योगदान रहा।
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रामलीला में मेघनाद के बाण चलाने पर लक्ष्मण के मूर्छित हो जाने पर दर्शकों की आंखे नम हो गई। वहीं सुषेन वैद्य द्वारा बूटी पिलाते ही लक्ष्मण उठ जाते हैं। लक्ष्मण के जीवित होते ही जयकारे से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद कुंभकरण का वध का मंचन किया गया। वध होते ही दर्शकों ने जयश्रीराम का उद्घोष किया। इसी दौरान अहिरावण राम लक्ष्मण को चुरा लाता है। तब हनुमान जी पाताल लोक से उन्हें मुक्त कराते हैं। इसके बाद राम रावण का युद्ध होता है। विभीषण के बताने पर भगवान श्रीराम रावण की नाभि पर तीर मारकर रावण का वध कर देते हैं। रावण का अंत होते ही दर्शकों के जयश्रीराम के उद्घोष से वातावरण गंज उठा। रामलीला मंचन को सफल बनाने में सुरेंद्र नाथ शर्मा, अरूण बंगा, अंगद गोड, प्रदीप शर्मा, लखीचंद शर्मा, अमरजीत गोड़, मनोज कुमार गुप्ता, रामलीला के संरक्षक उमाशंकर सिंह, व्यवस्थापक मनोज कुमार गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, राजूलाल, आनन्द खरवार आदि का योगदान रहा।
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