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जरुरतमंद लोगों की सहायता करने ही मानवता
Updated Wed, 30 May 2018 12:08 AM IST
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कोपागंज (मऊ)। रामायण हमें आदर, सेवा भाव, त्याग और बलिदान के साथ सदैव लोगों के हित में अग्रणी होने की पाठ सिखाती है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों और वनवासियों के कष्ट दूर करते हुए उन्हें संगठित करने का कार्य किया और समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर किया। यह विचार ब्लाक के लाड़नपुर स्थित चेरारामकापूरा में जारी सतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन सोमवार को कथा वाचक नीरज शास्त्री ने श्रद्वालुओं से व्यक्त की। सतचंडी महायज्ञ के समापन पर कथावाचक नीरज शास्त्री ने मौजूद श्रद्वालुओं को सुंदरकाण्ड की महिमा का वर्णन करते हुए कहा की सुंदरकांड मानस का सुंदर भाग है। आज समाज में सुंदरकांड के पाठ का प्रचलन है, इसीलिए किसी ग्रंथ के किसी विशेष भाग के पठन को परंपरा बनाने का अर्थ है कि हम उस भाग को बार-बार पढ़ें और अपने आचरण में उतार लें। मात्र पढने से कल्याण नहीं हो सकता। जैसे एक रोगी डॉक्टर से दवा लेकर आए, डॉक्टर दवा का पर्चा लिखकर दे दे, रोगी उस पर्चे को घर लेकर आए और उसे आदर से बार-बार पढ़े,तो उसका कल्याण नहीं हो सकता, स्वास्थ्य के लिए पर्चे पर लिखी दवा का सेवन करना आवश्यक है। इसी तरह ग्रंथों का पूर्ण लाभ लेने के लिए उन्हें जीवन में उतारना आवश्यक है। इस मौके पर जवाहिर तिवारी , विनोद तिवारी, राजेश राय ,पीयूष राय ,नरेंद्र राय ,धर्मेंद्र तिवारी, अजीत पांडेय ,समीर तिवारी ,नवीन सिंह और अमित सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
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