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जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने किया प्रदर्शन
Updated Thu, 15 Jun 2017 10:51 PM IST
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मऊ। उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के तत्वावधान में शिक्षकों ने गुरुवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। साथ ही जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष रामबिलास भारती ने कहा कि शिक्षा सत्र एक जुलाई से शुरू होगा, लेकिन अभी तक बच्चों को वितरित होने वाली नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए आवश्यक है कि बच्चों को पाठ्यपुस्तक समय से उपलब्ध कराया जाए। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य कराया जा रहा है। सरकार को यदि गुणवत्तापरक शिक्षा चाहिए तो छात्र छात्राओं तथा शिक्षकों के सम्मान और उनके हितों का ध्यान देना होगा। कहा कि जूनियर स्तर पर प्राथमिक विद्यालयों की तुलना में सभी छात्र छात्राएं शारीरिक रुप से विकसित व बड़े हो जाते हैं। ऐसे में उनके लिए भी दो सौ रुपये में गुणवत्ता यूनिफार्म दिया जाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। शासन अपने स्तर से प्रति छात्र दो सौ रुपये में यूनिफार्म दिए जाने की बजाय स्वयं यूनिफार्म की व्यवस्था करे। जिससे कि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर ढंग से दे सके। कहा कि एक जुलाई से खुलने वाले समस्त विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तक, बैग तथा यूनिफार्म उपलब्ध कराया जाए। कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद यादव ने कहा कि सरकार को यदि गुणवत्तापरक शिक्षा चाहिए तो सभी संसाधनों को बहाल किया जाए।
आभा त्रिपाठी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में गरीब तथा वंचित समाज के बच्चे अध्ययन करते हैं और इनके व्यवहार आचरण व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। किंतु इसके लिए सरकार को भी सहयोग करना होगा। बाबू राम ने कहा कि सरकार छात्र छात्राओं के लिए विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण यूनिफार्म, बैठने के लिए डेस्क बेंच तथा छूटे हुए विद्यालयों में विद्युतीकरण आदि की व्यवस्था करें। धरने मेें रामचंद्र, एकलाख अहमद, रिजवान अहमद, मिलन चौरसिया, जयप्रकाश, रामसुख यादव, राकेश यादव, कमला प्रसाद, इंद्रपति यादव, तपेश्वर राम, सुमन आदि शामिल रहे। संचालन अनवारुलहक ने किया।
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धरने को संबोधित करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष रामबिलास भारती ने कहा कि शिक्षा सत्र एक जुलाई से शुरू होगा, लेकिन अभी तक बच्चों को वितरित होने वाली नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए आवश्यक है कि बच्चों को पाठ्यपुस्तक समय से उपलब्ध कराया जाए। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य कराया जा रहा है। सरकार को यदि गुणवत्तापरक शिक्षा चाहिए तो छात्र छात्राओं तथा शिक्षकों के सम्मान और उनके हितों का ध्यान देना होगा। कहा कि जूनियर स्तर पर प्राथमिक विद्यालयों की तुलना में सभी छात्र छात्राएं शारीरिक रुप से विकसित व बड़े हो जाते हैं। ऐसे में उनके लिए भी दो सौ रुपये में गुणवत्ता यूनिफार्म दिया जाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। शासन अपने स्तर से प्रति छात्र दो सौ रुपये में यूनिफार्म दिए जाने की बजाय स्वयं यूनिफार्म की व्यवस्था करे। जिससे कि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर ढंग से दे सके। कहा कि एक जुलाई से खुलने वाले समस्त विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों को नि:शुल्क पुस्तक, बैग तथा यूनिफार्म उपलब्ध कराया जाए। कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद यादव ने कहा कि सरकार को यदि गुणवत्तापरक शिक्षा चाहिए तो सभी संसाधनों को बहाल किया जाए।
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आभा त्रिपाठी ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में गरीब तथा वंचित समाज के बच्चे अध्ययन करते हैं और इनके व्यवहार आचरण व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। किंतु इसके लिए सरकार को भी सहयोग करना होगा। बाबू राम ने कहा कि सरकार छात्र छात्राओं के लिए विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण यूनिफार्म, बैठने के लिए डेस्क बेंच तथा छूटे हुए विद्यालयों में विद्युतीकरण आदि की व्यवस्था करें। धरने मेें रामचंद्र, एकलाख अहमद, रिजवान अहमद, मिलन चौरसिया, जयप्रकाश, रामसुख यादव, राकेश यादव, कमला प्रसाद, इंद्रपति यादव, तपेश्वर राम, सुमन आदि शामिल रहे। संचालन अनवारुलहक ने किया।
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