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श्रीराम के धनुष तोड़ते ही जयकारे से गूंजा पंडाल
Updated Fri, 09 Nov 2018 11:29 PM IST
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मझवारा। श्री रामलीला समिति पवनी रामभवन मेला परिसर के तत्वावधान में संचालित रामलीला में गुरुवार को धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम के धनुष तोड़ते ही दर्शकों के जय श्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा। कलाकारों के भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया।
मंचन में राजा जनक द्वारा स्वयंवर में महर्षि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण को बुलाया जाता है। लेकिन रावण को आमंत्रित नहीं किया गया, फिर भी स्वप्न देखकर स्वयंवर में आया। वहां नभ मार्ग से रावण और बाणासुर पहुंचकर दोनों योद्धा अपना परिचय बताते हैं। तभी आकाशवाणी होती है कि उसकी कन्या को शुभनिशि दानव ले जा रहे हैं। यह सुनकर रावण लंका की तरफ चल देता है। दूर देश से पधारे राजा जब धनुष को हिला भी न सके तो राजा जनक ने निराश होकर कहा कि पृथ्वी वीरों से खाली है। ऐसे में मेरी पुत्री सीता आजीवन अविवाहित रह जाएगी। तब यह सुन विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर तोड़ देते हैं। इसके बाद सीता राम के गले में जयमाल डाल देती हैं। मंचन के दौरान दर्शक जय श्रीराम के जयकारे लगाने लगे। कलाकारों ने मधुर गीत गाकर लोगों को भक्तिमय बना दिया। धनुष तोड़ने का मंचन और परशुराम व लक्ष्मण संवाद आकर्षण का केंद्र रहा। राजा जनक अयोध्या के राजा दशरथ को बारात लाने की सूचना देते हैं। रामविवाह के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाया।
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मंचन में राजा जनक द्वारा स्वयंवर में महर्षि विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण को बुलाया जाता है। लेकिन रावण को आमंत्रित नहीं किया गया, फिर भी स्वप्न देखकर स्वयंवर में आया। वहां नभ मार्ग से रावण और बाणासुर पहुंचकर दोनों योद्धा अपना परिचय बताते हैं। तभी आकाशवाणी होती है कि उसकी कन्या को शुभनिशि दानव ले जा रहे हैं। यह सुनकर रावण लंका की तरफ चल देता है। दूर देश से पधारे राजा जब धनुष को हिला भी न सके तो राजा जनक ने निराश होकर कहा कि पृथ्वी वीरों से खाली है। ऐसे में मेरी पुत्री सीता आजीवन अविवाहित रह जाएगी। तब यह सुन विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर तोड़ देते हैं। इसके बाद सीता राम के गले में जयमाल डाल देती हैं। मंचन के दौरान दर्शक जय श्रीराम के जयकारे लगाने लगे। कलाकारों ने मधुर गीत गाकर लोगों को भक्तिमय बना दिया। धनुष तोड़ने का मंचन और परशुराम व लक्ष्मण संवाद आकर्षण का केंद्र रहा। राजा जनक अयोध्या के राजा दशरथ को बारात लाने की सूचना देते हैं। रामविवाह के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाया।
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