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Mathura News: बिना प्रतिस्पर्धा के खिलाड़ी का मानसिक व शारीरिक विकास अधूरा
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अमर उजाला कार्यालय में मौजूद खेल शिक्षक। संवाद
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मथुरा। जिले में खेल गतिविधियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और स्थानीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से खेल शिक्षकों ने मंथन किया। खेल विशेषज्ञों और शारीरिक शिक्षकों ने वर्तमान खेल ढांचे में सुधार, आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डैंपियर नगर के अहिल्याबाई चौक स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में विभिन्न स्कूल, कॉलेज व एकेडमी के खेल विशेषज्ञों ने अपने सुझाव रखे। कहा कि, जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन संसाधनों का अभाव उनकी राह में रोड़ा बन रहे हैं। अगर खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना है तो उन्हें प्रशिक्षण के साथ बेहतर सुविधाएं प्रदान करनी होंगी। बिना प्रतिस्पर्धा के खिलाड़ी का मानसिक और शारीरिक विकास अधूरा है। जिला, क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के नियमित आयोजन का सुझाव दिया। कहा कि जितनी अधिक प्रतियोगिताएं होंगी, खिलाड़ियों का आत्मविश्वास उतना ही बढ़ेगा और प्रतिभाएं भी निखरेंगी। इस दौरान धीरज कुमार, जितेंद्र, अजय सिंह, नीरज चौधरी, श्रद्धा सारस्वत, नीरू शर्मा, ओमविशन सिंह, नरेंद्र सिंह, किशन वीर सिंह और सागर सोनी समेत अन्य शिक्षक व विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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नई खेल एकेडमी खुलने से मिलेगी उड़ान
युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने के लिए शिक्षकों ने नई खेल एकेडमी खोलने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विशिष्ट खेलों (जैसे कुश्ती, एथलेटिक्स, फुटबॉल और बैडमिंटन) के लिए अलग से अकादमी होनी चाहिए, जहां कोच की देखरेख में खिलाड़ी सुबह-शाम अभ्यास कर सकें। इससे वह प्रेरित होंगे और नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
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डैंपियर नगर के अहिल्याबाई चौक स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में विभिन्न स्कूल, कॉलेज व एकेडमी के खेल विशेषज्ञों ने अपने सुझाव रखे। कहा कि, जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन संसाधनों का अभाव उनकी राह में रोड़ा बन रहे हैं। अगर खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना है तो उन्हें प्रशिक्षण के साथ बेहतर सुविधाएं प्रदान करनी होंगी। बिना प्रतिस्पर्धा के खिलाड़ी का मानसिक और शारीरिक विकास अधूरा है। जिला, क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के नियमित आयोजन का सुझाव दिया। कहा कि जितनी अधिक प्रतियोगिताएं होंगी, खिलाड़ियों का आत्मविश्वास उतना ही बढ़ेगा और प्रतिभाएं भी निखरेंगी। इस दौरान धीरज कुमार, जितेंद्र, अजय सिंह, नीरज चौधरी, श्रद्धा सारस्वत, नीरू शर्मा, ओमविशन सिंह, नरेंद्र सिंह, किशन वीर सिंह और सागर सोनी समेत अन्य शिक्षक व विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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नई खेल एकेडमी खुलने से मिलेगी उड़ान
युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने के लिए शिक्षकों ने नई खेल एकेडमी खोलने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विशिष्ट खेलों (जैसे कुश्ती, एथलेटिक्स, फुटबॉल और बैडमिंटन) के लिए अलग से अकादमी होनी चाहिए, जहां कोच की देखरेख में खिलाड़ी सुबह-शाम अभ्यास कर सकें। इससे वह प्रेरित होंगे और नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
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