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पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने की वटवृक्ष की पूजा -
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गोवर्धन में वट वृक्ष की पूजा अर्चना करती महिलाएं।
- फोटो : MATHURA
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मथुरा। पति की आयु लंबी हो इसलिए महिलाओं ने शुक्रवार को वटवृक्ष की पूजा की। महिलाएं वटवृक्ष की पूजा के लिए पहुंचीं। उन्होंने वट सावित्री की पूजा अर्चना की। सौभाग्यवती होने की कामना की। सुबह से ही पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। स्नान करने के बाद महिलाओं ने सूर्य देवता को जल अर्पित किया। इसके बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए घर या फिर आसपास लगे वटवृक्ष पर सूत बांधते हुए परिक्रमा की और पति की लंबी आयु की कामना की।
ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। संयोग की बात है कि इसी दिन शनि महाराज का जन्म हुआ है और सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की।
सावित्री और सत्यवान की कथा से वटवृक्ष का महत्व लोगों को ज्ञात हुआ क्योंकि इसी वृक्ष ने सत्यवान को अपनी शाखाओं और शिराओं से घेरकर जंगली पशुओं से उनकी रक्षा की थी। इसी दिन से जेष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट की पूजा का नियम शुरू हुआ। वट अमावस्या के दिन महिलाएं पूजन कर अपने पति की लंबी आयु की कामना करतीं हैं।
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ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। संयोग की बात है कि इसी दिन शनि महाराज का जन्म हुआ है और सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की।
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सावित्री और सत्यवान की कथा से वटवृक्ष का महत्व लोगों को ज्ञात हुआ क्योंकि इसी वृक्ष ने सत्यवान को अपनी शाखाओं और शिराओं से घेरकर जंगली पशुओं से उनकी रक्षा की थी। इसी दिन से जेष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट की पूजा का नियम शुरू हुआ। वट अमावस्या के दिन महिलाएं पूजन कर अपने पति की लंबी आयु की कामना करतीं हैं।
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