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Mathura News: कोषागार में मिलीभगत से हो रहा था खेल
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मथुरा। कोषागार में 1.62 करोड़ रुपये के घोटाले की पुलिस जांच तेज होते ही विभाग में खलबली मच गई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव ने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। उसने बताया कि कोषागार में पूरा खेल मिलीभगत और एक सोचे-समझे नेटवर्क के जरिये चल रहा था। पुलिस ने निवर्तमान दो वरिष्ठ कोषाधिकारियों समेत छह विभागीय कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सहायक लेखाकार अभिषेक पर आरोप है कि वह 2020 से छह मृत पेंशनरों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाकर अपने बैंक खाते में पेंशन की रकम ट्रांसफर करता रहा। महालेखाकार (एजी) पेंशन प्रयागराज की टीम की जांच में यह खेल पकड़ा गया था। अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र की जांच में 1.62 करोड़ का घोटाला सामने आया। जांच की भनक लगने के बाद 24 जनवरी से सहायक लेखाकार लापता हो गया। वहीं कोषागार के अधिकारियों ने उसके खिलाफ सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी।
इधर, आरोपी पुलिस को धता बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से 26 अप्रैल को गिरफ्तारी पर स्टे ले आया था। स्टे समाप्त होने के एक दिन पहले 25 मई को सहायक लेखाकार थाने पहुंच गया। यहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कोर्ट में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तो उसने घोटाले से संबंधित कई राज उगले हैं। पूछताछ में जैसे ही दो निवर्तमान वरिष्ठ कोषाधिकारी समेत छह कर्मचारियों के नाम केस डायरी में शामिल हुए तो कोषागार कार्यालय में खलबली मच गई। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि मामले की जांच जारी है। कुछ नाम सामने आए हैं, उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।
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सहायक लेखाकार अभिषेक पर आरोप है कि वह 2020 से छह मृत पेंशनरों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाकर अपने बैंक खाते में पेंशन की रकम ट्रांसफर करता रहा। महालेखाकार (एजी) पेंशन प्रयागराज की टीम की जांच में यह खेल पकड़ा गया था। अपर निदेशक (एडी) पेंशन, आगरा महिमा चंद्र की जांच में 1.62 करोड़ का घोटाला सामने आया। जांच की भनक लगने के बाद 24 जनवरी से सहायक लेखाकार लापता हो गया। वहीं कोषागार के अधिकारियों ने उसके खिलाफ सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी।
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इधर, आरोपी पुलिस को धता बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से 26 अप्रैल को गिरफ्तारी पर स्टे ले आया था। स्टे समाप्त होने के एक दिन पहले 25 मई को सहायक लेखाकार थाने पहुंच गया। यहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कोर्ट में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तो उसने घोटाले से संबंधित कई राज उगले हैं। पूछताछ में जैसे ही दो निवर्तमान वरिष्ठ कोषाधिकारी समेत छह कर्मचारियों के नाम केस डायरी में शामिल हुए तो कोषागार कार्यालय में खलबली मच गई। सीओ सिटी आशना चौधरी ने बताया कि मामले की जांच जारी है। कुछ नाम सामने आए हैं, उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।
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