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Mathura: श्रीजी की सखियों के मंदिर का पौराणिक स्वरूप होगा विकसित, जानें क्या है पूरी योजना

Tue, 27 May 2025 11:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 27 May 2025 11:35 AM IST
सार

ब्रजभूमि के मठ-मंदिरों को पौराणिक स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही नए संपर्क मार्गों का भी निर्माण कराया जा रहा है। ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में आसानी हो सके। इसी के तहत राधारानी की अष्टसखियों के मंदिरों सौंदर्यीकरण होगा। साथ ही संपर्क मार्ग बढ़ाए जाएंगे।

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The temples of Shreeji's friends will be decorated in mythological form
मथुरा। राधारानी की सखी इंदुलेखा का मंदिर। - फोटो : mathura

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन के बाद राधारानी की नगरी बरसाना में श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। ब्रह्मंचल पर्वत पर विराजमान राधारानी के मंदिर तक रोपवे की उपलब्धता ने श्रद्धालुओं के आकर्षण को और बढ़ा दिया है। बीते वर्ष 67.93 लाख श्रद्धालुओं ने श्रीजी के दर्शन किए थे। इसमें 70 हजार विदेश भक्त भी शामिल हैं।
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इस साल अब तक करीब 35 लाख श्रद्धालु बरसाना पहुंचे हैं, जबकि बीते वर्ष चार माह का आंकड़ा 28 लाख था। हर साल श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने राधारानी की अष्टसखियों के मंदिरों का सौंदर्यीकरण और संपर्क मार्ग निर्माण कराने की योजना बनाई है। बरसाना में न केवल राधा अष्टमी और लठामार होली पर श्रद्धालु आते हैं, बल्कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
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उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि बरसाना के आसपास राधारानी की सखियों के गांव हैं। इन गांवों स्थित मंदिरों के लिए संपर्क मार्ग बनाए जाएंगे। साथ ही स्ट्रीट लाइट, साइन बोर्ड समेत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण होगा। मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं के बैठने और पेयजल व्यवस्था की जाएगी। इस योजना पर करीब 26 करोड़ रुपये का खर्च जाएगा।
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ये हैं गांव
ललिता सखी (ऊंचा गांव), इंदुलेखा सखी (आजनौख), चित्रा सखी (चिकसोली), चंपकलता सखी (करहला), तुंग विद्या सखी (डभाला), विशाखा सखी (कमाई) व रंगदेवी सखी (रांकोली)।
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