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Mathura News: अंग्रेजों ने सेमरी से तोप लगाकर दागे थे सराय शाही किले पर गोले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Aug 2024 02:03 AM IST
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The British had fired cannons from Semri and shelled Sarai Shahi fort
मथुरा। देश को आजादी दिलाने में छाता कस्बे के कई क्रांतिकारियों ने अपना योगदान दिया है। यहां स्थित सराय शाही किला सेनानियों के संघर्ष का साक्षी है। स्वतंत्रता सेनानी हरेकृष्ण आर्य, खेम सिंह महाशय, चौ. भरत सिंह, गोविंद सिंह, पातीराम महाशय, राजपाल महाशय, मिश्रीलाल और लालाराम महाशय आदि ऐसे नाम हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। इससे कुपित होकर अंग्रेजी हुकूमत ने शाही किले पर गांव सेमरी से तोप लगाकर गोले दागे थे। आगरा की ओर वाले किले के बुर्ज को क्षतिग्रस्त कर कई स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार कर फांसी पर लटका दिया था।
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कस्बा निवासी विनोद कुमार आर्य, नारायण सिंह, भगत सिंह, परसौती जादौन, दीपक आर्य आदि ने बताया कि भारत की आजादी के लिए देशभर में आंदोलन हुए। इनमें महात्मा गॉधी, सुभाषचंद्र बोस, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं पं. जवाहरलाल नेहरू आदि ने ब्रज में सभाएं कीं थीं। राष्ट्र नायकों के भाषण से प्रभावित होकर महाशय हरेकृष्ण ने कस्बे में बनी सराय शाही पर तिरंगा लहराया था। अंग्रेजों ने उनके आंदोलन में शामिल होने के चलते आवास व सामान को कई बार कुर्क किया। इसकी वजह से उन्हे अपना सामान अन्य लोगों के घरों में रखना पड़ता था।
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गांधीजी को पिलाई थी छाछ
कस्बा निवासी विजय कुमार आर्य ने बताया कि उनके पिता महाशय हरेकृष्ण आर्य ने देश की लड़ाई में सहपाठियों के साथ मिलकर एक टीम गठित की। उन्होंने छाता में आर्य समाज की स्थापना की थी। महात्मा गांधी के छाता आने पर माता फूलवती देवी ने नाश्ते में छाछ और दलिया खिलाया था। पिता जिला कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रहे थे। उनके तीन बेटों में सबसे छोटा मैं हूं। बताया कि उनका जन्म पिता के जेल से लौटने के बाद 1947 में हुआ तो उन्होंने नाम विजय रखा था।
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खेमचंद ने बनाए थे बम

निरंजन सिंह आजाद ने बताया कि उनके पिता खेमचंद महाशय ने पांच सहपाठियों के साथ मिलकर मथुरा जनपद प्रशासन की नींद हराम कर दी। इतना ही नहीं पुलिस के बर्बर अत्याचारों व जेल यातनाओं से निर्भीक होकर जगह-जगह पिकेटिंग की। बम बनाने का साहसपूर्ण कार्य किया, इससे अंग्रेज सरकार के अधिकारी परेशान रहते थे। उन्होंने अपने आवास पर गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का कार्य किया।



लालाराम कई बार गए जेल

महेंद्र सिंह जादौन ने बताया कि लालाराम उनके पिता थे। उन्होंने कस्बे से भारत की आजादी की लड़ाई में भाग लिया। वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार हुए और 1922 में छाता हवालात से मुक्त हुए। 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में जनपद के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा अर्पूण जुलूस निकाला। उन्होंने नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। 1930 में 10 मास के कारावास का दंड मिला। 1941 में कैद और 50 रुपये जुर्माने की सजा मिली।
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