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वसंत पंचमी पर कमर में फेंटा बांधकर होली खेलेंगे ठाकुरजी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 08:30 PM IST
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Thakurji will play holi on Vasant Panchami by tying a bow around his waist.
वृंदावन (मथुरा)। वसंत पंचमी पर जन-जन के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज कमर में फेंटा बांधकर भक्तों के संग होली खेलेंगे। शृंगार आरती दर्शनों के उपरांत भक्तों पर गुलाल लुटाया जाएगा। मंदिर में अबीर-गुलाल के बादल छाएंगे और देश-देशांतर से आने वाले भक्त अपने आराध्य के प्रसाद रूपी गुलाल में सराबोर होकर धन्य होंगे। इसी के साथ वसंत पंचमी से ब्रज की होली का भी शुभारंभ हो जाएगा।
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पांच फरवरी को वसंत पंचमी के पर्व पर शृंगार आरती के बाद मंदिर में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज वसंती पोशाक धारण कर प्रतीकात्मक रूप से भक्तों संग गुलाल की होली खेलेंगे। मंदिर के सेवायत गोस्वामियों द्वारा चांदी के थालों में लाल, हरा, वसंती, गुलाबी और पीले रंग का गुलाल भक्तों पर डाला जाएगा।
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मंदिर के सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि वसंत पंचमी से ही श्रीबांकेबिहारी महाराज को कपोलों (गालों) पर गुलाल लगाकर और कमर में गुलाल का फेंटा बांधकर तैयार कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी से ही मंदिर में होली के गायन के साथ ही ब्रज में ४० दिन का होली उत्सव भी प्रारंभ हो जाता है।
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प्राचीन परंपराओं का होता है निर्वहन
ठाकुरजी के सेवायत एवं श्रीहरिदासबिहारी फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन सर्वप्रथम श्रीबांकेबिहारीजी महाराज को गुलाल अर्पित करने के साथ ही होलिकोत्सव के औपचारिक शुभारंभ की परंपरा हरित्रयी के सुनाम से विख्यात स्वामी हरिदासजी, हित हरिवंशजी एवं हरि रामव्यासजी के समय से ही चली आ रही है। भक्तिकाल के उस स्वर्णिम दौर में रसिक संतजनों के आग्रह पर संगीत सम्राट स्वामी हरिदासजी पद गायन के माध्यम से अक्सर महोत्सवों की शुरूआत करते थे। तत्कालीन समय में संत व भक्तों ने समन्वय स्वरूप एक साथ मिलकर माघ शुक्ला पंचमी से चैत्र कृष्णा द्वितीया तक मदनोत्सव के नाम से एक उत्सव मनाना आरंभ किया, जिसे अब वसंतोत्सव अथवा होली आगमनोत्सव भी कहा जाता है। समूचे ब्रज मंडल में सवा माह तक चलने वाले इस रंगीले-रसीले महापर्व का प्रारंभिक पदगान हरिदासजी ने किया और बिहारीजी के कपोलों पर गुलाल लगाया था, प्रतीकरूप में वही परंपरा अब तक चली आ रही है।
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