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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Thakur Banke Bihari first sat in the Golden Hindole on 15 August 1947

15 अगस्त 1947 से बांके बिहारी का है खास नाता: आजादी का हुआ शोर, तब पहली बार स्वर्ण हिंडोले में विराजे ठाकुर जी

Sat, 12 Aug 2023 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो राहुल दक्ष, मथुरा
राहुल दक्ष, मथुरा Updated Sat, 12 Aug 2023 12:26 AM IST
सार

15 अगस्त 1947 ये तारीख हर हिंदुस्तानी के लिए वो पल था, जब लोगों ने आजादी की खुशी को महसूस किया। ये दिन वृंदावन के लिए भी बेहद खास था। इसी दिन पहली बार ठाकुर बांकेबिहारी ने स्वर्ण हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए थे।

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Thakur Banke Bihari first sat in the Golden Hindole on 15 August 1947
स्वर्ण रजत हिंडोले में विराजे कृष्ण और बलराम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जब देश अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, तब ठाकुर बांकेबिहारी ने भी पहली बार स्वर्ण हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। सोने, चांदी से जड़ित इस हिंडोले में पहली बार हरियाली तीज पर्व पर 15 अगस्त 1947 को बांकेबिहारी मंदिर में प्रभु स्वर्ण हिंडोले में विराजमान हुए, तभी से हरियाली तीज पर निरंतर जन-जन के आराध्य स्वर्ण हिंडोले में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।
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कोलकाता के सेठ ने बनवाया था स्वर्ण हिंडोला

ठाकुर बांकेबिहारी की पिछले सौ वर्ष से सेवा कर रहे कोलकाता के सेठ हरगूलाल के परिवार ने मंदिर के गोस्वामियों के सहयोग से स्वर्ण हिंडोला बनवाया। सेठ के मुनीम ओंकार मल ने हिंडोले में लगने वाली लकड़ी के लिए नेपाल में एक जंगल खरीदा था। शीशम की लकड़ी रेल द्वारा नेपाल से वृंदावन लाई गई। कीमती लकड़ी की नक्काशी बनारस के प्रसिद्ध कारीगर लल्लन भाई एवं बिहारी लाल की देखरेख में की गई।
 
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15 से अधिक लगे कारीगर

वर्ष 1942 में हिंडोला बनाने का कार्य शुरू किया गया। बनारस के 15 से अधिक कारीगरों ने पांच साल में हिंडोला बनाकर तैयार किया। इस विशेष हिंडोले में एक लाख तोला चांदी और 2200 तोला सोना जड़ा गया। फोल्डिंग हिंडोला में छोटे बड़े 125 नग हैं। इसकी देखरेख का जिम्मा तभी से सेठ हरगूलाल का परिवार द्वारा की जा रही है। समय-समय पर इसकी देखरेख और पॉलिश करने के लिए दिल्ली के कारीगर भी आते हैं।
 
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125 नगों को जोड़कर हिंडोला तैयार किया गया

पिछले कई दशक से सेठ हरगूलाल परिवार के निर्देशन में हिंडोले की देखरेख कर रहे महाराम सिंह ने बताया कि हरियाली तीज पर्व पर 15 अगस्त 1947 को पहली बार ठाकुर बांकेबिहारी भव्य स्वर्ण हिंडोले में विराजमान हुए। यह हिंडोला चालीस के दशक में जरूर बना लेकिन इसमें आधुनिक तकनीक अपनाई। 125 नगों को जोड़कर हिंडोला तैयार किया गया। इसके साथ ही बरसाना स्थित राधारानी मंदिर के लिए भी ऐसा ही छोटा हिंडोला बनाया गया, जिसमें समय-समय पर राधारानी विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देती हैं।
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