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Mathura News: निलंबित रिसीवर रामकटोर पांडेय पूर्ण रूप से हटाए गए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2024 05:46 AM IST
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Suspended receiver Ramkator Pandey completely removed
बलदेव। बलदेव के ठा. श्री दाऊजी महाराज मंदिर के रिसीवर पद से विलंबित किए गए रामकटोर पांडेय को अदालत ने पूर्ण रूप से रिसीवर पद से हटाने का आदेश दिया है। अपर जिला न्यायाधीश डा. पल्लवी अग्रवाल ने आदेश दिए कि इन्हें नए रिसीवर की नियुक्ति के लिए भी संज्ञान में नहीं लिया जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि इन्होंने अपने दायित्वों की उपेक्षा की और शक्तियों का दुरुपयोग किया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि जिन्होंने भी रिसीवर बनने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है वे तीस सितंबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों।
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दरअसल इस मंदिर के कार्यवाहक रिसीवर ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया कि खातों के संचालन का आदेश न होने के कारण मंदिर के कर्मचारियों का वेतन नहीं निकल पा रहा है। साथ ही जो निर्माण चल रहे हैं उनके पेमेंट भी करने हैं। कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को सुना तो पाया कि न्यायालय में प्रस्तुत किए गए विभिन्न वाद में तत्कालीन रिसीवर ने किसी भी निर्माण कार्य के लिए न तो कोर्ट को सूचित किया और न ही यह बताया कि निर्माण किस बाबत चल रहा है। उसमें कितना खर्च आया है और उसका भुगतान किस मद में होना है, इसका कोई विवरण पत्रावली पर नहीं पाया। यहां तक कि पूर्व रिसीवर रामकटोर पांडेय की पत्रावली में इतने सालों में मंदिर के निर्माण कार्यों की कोई सूचना कोर्ट को नहीं दी गई। कोर्ट ने कहा है कि मंदिर की स्थायी संपत्ति में परिवर्तन होना गंभीर विषय है पर इस संबंध में भी न्यायालय को कोई सूचना नहीं दी गई। वार्षिक आडिट रिपोर्ट में निर्माणों के व्यय का कोई उल्लेख नहीं है। रिसीवर ने ऐसे कृत्य किए मानो वह संपत्ति के मालिक हों जबकि वे न्यायालय द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत ही मंदिर की सुचारू व्यवस्था का क्रियान्वयन कराने के लिए नियुक्त किए गए थे।
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इस तरह रजिस्ट्री भेजना गलत, नियमानुसार कथन करें
9 सितंबर को एक रजिस्ट्री न्यायालय को प्राप्त हुई। इस पर अति गोपनीय लिखकर यादवेंद्र पांडेय, संजीव, राजकुमार, अरुण, मुरारी,सोनू पांडेय, घनश्याम, विष्णु, दाऊदयाल, रामनिवा, हरीराम, मुंशीराम, नारायन हरि, अनिल व प्रशांत समेत 16 व्यक्तियों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने स्वयं को सेवायत बताते हुए कहा है कि सेवायत लगातार पत्रावली में उपस्थित होते रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि इस प्रकार से रजिस्ट्री पत्र लिखकर भेजना अत्यधिक आपत्तिजनक है। यह न्यायालय पर दबाव बनाने की श्रेणी में आता है। इन सभी के विरुद्ध कार्यवाही हो सकती हैद। पक्षकार जो भी कथन करना चाहते हैं, नियमानुसार कर सकते हैं।
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