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दो बीघा के भरोसे थी बेटी की विदाई

जितेंद्र पुजारी Updated Wed, 08 Apr 2015 12:01 AM IST
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story of farmer's family in mathura

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गांव लौधौली में दो मार्च की सुबह गहरे घाव लिए थी। हाल ही में हुई बरसात से फसल की बर्बादी का गम जैसे तैसे दूर कर पाए किसानों पर पिछले दिन ओलों ने कहर बरपाया था। ऐसे में दो बीघा गेेहूं के भरोसे बेटी के हाथ पीले करने का ख्वाब पाले महिपाल खेत पर गए तो लड़खड़ाते कदमों से लौटे। लौटे भी क्या शायद दुनिया से विदाई घर से ही लिखी था। बेटा पिता की हालत देखकर डॉक्टर को बुलाने गया था लेकिन डाक्टर के आने तक केवल शरीर रहा महिपाल नहीं। किसान के घर से मुखिया की विदाई ने कई अरमानों पर ग्रहण लगाया। 30 अप्रैल को घर में बारात आनी है, घर में चिंता बिटिया की विदाई की है।  
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लौधौली में महिपाल सिंह का छोटा सा घर जिसमें एक कमरा और आगे टिनशेड में बरामदा है। यहां की फजाओं में अब अरमान नहीं चिंताएं हैं। पत्नी सुमन का रो-रोकर बुरा हाल है। बमुश्किल बता  सकीं छोटी बिटिया का रिश्ता तय हो गया और 30 अप्रैल को बारात आनी है।


बेटे योगेश ने बताया कि दो बीघा जमीन में गेहूं की फसल देख पिताजी सिहा रहे थे। अरमान था फसल बेचकर जो पैसे आएंगे उससे बिटिया के विवाह में दहेज देंगे। मार्च के महीने में तेज आंधी और बरसात ने गांव की फसल बर्बाद कर दी। पत्नी ने बताया कि उन्होंने दो मार्च को भोर में टार्च मांगी और अकेले ही खेत पहुंच गए। खेतों में बिछी फसल देखकर महीपाल का कलेजा ऐसे फटा कि लड़खड़ाते कदमों से घर पहुंचे। बेटे से डाक्टर को बुलवाने के लिए कहा लेकिन पहले ही दुनिया से चल बसे।


ये है प्रशासनिक हकीकत
करीब एक पखवाडे़ पहले राजस्व निरीक्षक और लेखपाल जांच कर ले गए हैं लेकिन अभी तक मृतक के परिवार को कोई सहायता नहीं मिली है। नेता भी आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं।


परिवार पर डेढ़ लाख का कर्ज
महीपाल सिंह ने दो बीघा खेत पर डेढ़ लाख का कर्ज ले रखा था। कर्ज के बोझ तले अन्नदाता इसे चुकाने की जुगत में भी लगा था। इसीलिए खेती से जो समय बचता उसमें एक विद्यालय में माली का कार्य करते। परिवार में आय का एक मात्र साधन खेती है लेकिन परिवारीजनों को क्या पता था कि महीपाल उनको बीच मझदार में छोड़कर चले जाएंगे।


पहले सूखा, अब बरसात ने मारा
छोटे बेटे विजय ने बताया पिताजी ने कर्ज लेकर अपनी दो बीघा जमीन में धान की फसल लगाई थी।  वो सूखे की चपेट में आ गई। इसका आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला है और अब आंधी, बरसात ने सब चौपट कर दिया।

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