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Mathura News: पुलिस-प्रशासन की सही व्यवस्था होती तो नहीं डूबता रोहित
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बलदेव। यमुना में नहाने के दौरान डूब रहे रोहित के परिजन चाहकर भी कुछ नहीं कर सके। आसपास के लोगों ने पहले अपने स्तर पर प्रयास किए, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। लापरवाही का आलम यह रहा कि सूचना के तीन घंटे बाद तक कोई तैराक या गोताखोर मौके पर नहीं आए।
किनारे पर खडे़ बेबस परिजन विलाप करते रहे।पुलिस और गोताखोरों ने नाव व दो स्टीमर के जरिए बलदेव से 10-12 किलोमीटर दूर तक लहरौली घाट, सैतरी तक तलाश की लेकिन रोहित का पता नहीं चला। हथौड़ा से भी काफी लोग पहुंच गए। घाट पर चारों ओर भारी भीड़ थी। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की। यमुना घाट पर कोई तैराक नहीं थे और न नाव और स्टीमर। पुलिस की तैनाती नहीं थी। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया।
विजय सिंह के तीन पुत्रों में सबसे बड़ा भूरा सिंह, कुशल पाल व सबसे छोटा रोहित था जो पहलवानी करता था। शरीर व कद-काठी में काफी मजबूत था। बुद्धा सिंह प्रधान, रामगोपाल सिंह, मनवीर शर्मा, पूरन सिंह आदि ने बताया पुलिस प्रशासन की व्यवस्था सही होती तो युवक नहीं डूबता। हजारों लोग स्नान को आए हों तो गोताखोर, नाव, स्टीमर, यमुना में बैरीकेडिंग की व्यवस्था और पुलिस तैनात होनी चाहिए थी।
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किनारे पर खडे़ बेबस परिजन विलाप करते रहे।पुलिस और गोताखोरों ने नाव व दो स्टीमर के जरिए बलदेव से 10-12 किलोमीटर दूर तक लहरौली घाट, सैतरी तक तलाश की लेकिन रोहित का पता नहीं चला। हथौड़ा से भी काफी लोग पहुंच गए। घाट पर चारों ओर भारी भीड़ थी। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की। यमुना घाट पर कोई तैराक नहीं थे और न नाव और स्टीमर। पुलिस की तैनाती नहीं थी। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया।
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विजय सिंह के तीन पुत्रों में सबसे बड़ा भूरा सिंह, कुशल पाल व सबसे छोटा रोहित था जो पहलवानी करता था। शरीर व कद-काठी में काफी मजबूत था। बुद्धा सिंह प्रधान, रामगोपाल सिंह, मनवीर शर्मा, पूरन सिंह आदि ने बताया पुलिस प्रशासन की व्यवस्था सही होती तो युवक नहीं डूबता। हजारों लोग स्नान को आए हों तो गोताखोर, नाव, स्टीमर, यमुना में बैरीकेडिंग की व्यवस्था और पुलिस तैनात होनी चाहिए थी।
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