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नगर भ्रमण को निकले भगवान जगन्नाथ
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
Updated Sat, 18 Jul 2015 11:56 PM IST
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अग्रज बलराम, अनुजा सुभद्रा और श्रीचक्र के साथ भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर कान्हा की जन्मस्थली में भ्रमण के लिए निकले। भगवान के रथ को खींचने के लिए ब्रजवासियों में भी होड़ रही। इस दौरान संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।
नगर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया गया था। शाम के समय विधिविधान से भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ, सुभद्रा और श्रीचक्र के विग्रह को पूजा अर्चन के साथ रथ पर विराजमान किया गया। सभी विग्रहों को भव्य शृंगार धारण कराते हुए आरती की गई। इस दौरान संकीर्तन के साथ भगवान की जयजयकार हुई।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुुरू हुई रथ यात्रा में सबसे आगे अश्वारोही संस्थान का प्रतीक चिन्ह और ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे भगवान की सवारी के आने के सूचक के रूप में ढोल, ताशा दल, बैंड आदि थे। यह सभी भक्ति संगीत के साथ ब्रजमंडल के गौड़ीय संकीर्तन मंडल के साधु-संत हरिबोल, जय जगन्नाथ का उच्चारण कर रहे थे। रथयात्रा में चैतन्य महाप्रभु और निताई-निमाई के युगल स्वरूप की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
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रथ यात्रा जन्मस्थान से प्रारंभ होकर मंडी रामदास, चौक बाजार, स्वामीघाट, राजाधिराज बाजार, छत्ता बाजार, तिलकद्वार, कोतवाली रोड, भरतपुर दरवाजा और दरेसी होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची। जगह-जगह रथयात्रा का भक्तों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं को शीतल पेय और शर्बत भी पिलाया गया। भक्तों में सभी की कोशिश भगवान जगन्नाथ के रथ को कुछ दूर खींचने की थी। इस दौरान गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, चंद्रभान गुप्ता, राजीव श्रीवास्तव, गिर्राज शरण, विजय बहादुर, भगवान स्वरूप शर्मा, नरायन राय, अनुराग पाठक आदि साथ रहे।
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नगर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया गया था। शाम के समय विधिविधान से भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ, सुभद्रा और श्रीचक्र के विग्रह को पूजा अर्चन के साथ रथ पर विराजमान किया गया। सभी विग्रहों को भव्य शृंगार धारण कराते हुए आरती की गई। इस दौरान संकीर्तन के साथ भगवान की जयजयकार हुई।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुुरू हुई रथ यात्रा में सबसे आगे अश्वारोही संस्थान का प्रतीक चिन्ह और ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे भगवान की सवारी के आने के सूचक के रूप में ढोल, ताशा दल, बैंड आदि थे। यह सभी भक्ति संगीत के साथ ब्रजमंडल के गौड़ीय संकीर्तन मंडल के साधु-संत हरिबोल, जय जगन्नाथ का उच्चारण कर रहे थे। रथयात्रा में चैतन्य महाप्रभु और निताई-निमाई के युगल स्वरूप की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
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रथ यात्रा जन्मस्थान से प्रारंभ होकर मंडी रामदास, चौक बाजार, स्वामीघाट, राजाधिराज बाजार, छत्ता बाजार, तिलकद्वार, कोतवाली रोड, भरतपुर दरवाजा और दरेसी होते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची। जगह-जगह रथयात्रा का भक्तों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं को शीतल पेय और शर्बत भी पिलाया गया। भक्तों में सभी की कोशिश भगवान जगन्नाथ के रथ को कुछ दूर खींचने की थी। इस दौरान गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, चंद्रभान गुप्ता, राजीव श्रीवास्तव, गिर्राज शरण, विजय बहादुर, भगवान स्वरूप शर्मा, नरायन राय, अनुराग पाठक आदि साथ रहे।