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मथुरा-वृंदावन ब्रॉडगेज की राह नहीं आसानः उजाड़नी पड़ेगी नई बस्ती, रेलवे ने 200 घरों में चस्पा किए नोटिस

Thu, 09 Feb 2023 02:25 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 09 Feb 2023 02:25 PM IST
सार

मथुरा-वृंदावन के बीच मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदलना सांसद हेमामालिनी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लेकिन, इसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा अतिक्रमण है। इसको हटाने के लिए रेलवे ने 200 घरों में नोटिस चस्पा किए हैं। 

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Railways have pasted notices for removal of about 200 houses in new township between Mathura-Vrindavan
नोटिस (सांकेतिक फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मथुरा-वृंदावन के बीच मीटर गेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने की तैयारी चल रही है। इस राह में सबसे बड़ी अड़चन नई बस्ती बन रही है। यहां बने करीब 200 घरों को हटाने के लिए रेलवे ने नोटिस जारी की है। जो इन घरों में चस्पा कर दिए गए हैं। नोटिस में कब्जाधारियों को 21 दिन का समय दिया गया है। 

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उधर, नोटिस चस्पा होते ही नई बस्ती के लोगों में खलबली मच गई है। वह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से बचने के प्रयासों में जुट गए हैं। करीब 204 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए आम बजट में 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसी क्रम में रेलवे सबसे पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने जा रहा है।

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सांसद का है ड्रीम प्रोजेक्ट

सांसद हेमामालिनी के ड्रीम प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा रेल लाइन किनारे किए गए अतिक्रमण हैं। इसका सबसे बड़ा हिस्सा श्रीकृष्ण जन्मस्थान से कुछ दूरी पर स्थित मुस्लिमों की नई बस्ती है। इसमें करीब 200 मकान हैं। अभी तक इस बस्ती को हटवाने के लिए रेलवे और प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे थे। लेकिन, अब रेलवे ने इस बस्ती को हटाने की पहल शुरू कर दी है। 

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नोटिस में क्या कहा गया 

नोटिस में कहा गया कि ‘आपका जो मकान बना हुआ है वह रेलवे की जमीन पर है। यह अतिक्रमण के दायरे में आता है। इस अतिक्रमण को अविलंब हटा लें। यदि नहीं हटाया तो रेलवे प्रशासन को हटाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।’ यह नोटिस 6 फरवरी को चस्पा किए गए हैं। उधर, नोटिस मिलने के बाद बस्ती वालों में खलबली मच गई है।

पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआती प्रक्रिया के तहत नोटिस दिए हैं। ताकि, लोगों को मालूम रहे कि उन्हें वहां से हटना है। हमने प्रशासन को पत्र लिखा है। उसमें इन सभी को अन्यत्र स्थानातंरित किए जाने की बात कही है। 

रेलवे प्रशासन बताए, उसकी कौन से खसरे की जमीन है

बस्ती को उजड़ने से बचाने के लिए नई बस्ती संघर्ष समिति तैयार की गई है। संयोजक याकुब शाह ने बताया कि बुधवार को उन्होंने डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया है। हमने रेल प्रशासन से मांग की है कि यदि उसकी जमीन है तो वह अपना खसरा संख्या बताए। रेलवे तमाम पत्राचार के बाद भी इस संबंध में कोई जबाव नहीं दे रहा है। प्रदर्शन करने वालों में गफ्फार अब्बास एडवोकेट, याकूब शाह, परवेज आलम, अब्दुल अशफाक, यामीन, मुन्ना, सईद अहमद, वकील, बबलू आदि मौजूद रहे।

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