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यहां आग लगी तो कान्हा ही बचाएं

Fri, 19 Jun 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 19 Jun 2015 11:39 PM IST
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possibilty of fire in buildings of mathura
हर दिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटकों का आगमन फिर भी सुरक्षा के नाकाफी इंतजाम। पुराने शहर से लेकर वृंदावन और गोवर्धन में तक में यही हाल है। होटल-कांप्लेक्स के नाम लोगों ने बहुमंजिला इमारत बना ली लेकिन उसमें अग्निशमन इंतजाम नहीं किए हैं। कुछ में केवल मैनुअल फायर एक्सटिंग्युशर से ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में प्रतापगढ़ जैसी घटना की पुनरावृत्ति होने पर लोगों की जान बचाने में मुश्किलें आ सकती हैं। 
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 मथुरा के पुराने शहर में होलीगेट, द्वारिकाधीश, बंगाली घाट, श्रीकृष्ण जन्मस्थान और बिरला मंदिर के आसपास क्षेत्र में 500 से अधिक होटल, गेस्टहाउस, धर्मशाला, व्यावसायिक इमारतें और कांपलेक्स हैं। इनमें से किसी में भी फायर लाइन सिस्टम नहीं है। ऐसा तब है जब हाईकोर्ट ने 15 मीटर ऊंचाई और 500 वर्ग गज या इससे ज्यादा कवर्ड एरिया में बनी इमारतों में फायर लाइन सिस्टम लगाने के आदेश दे दिए हैं।
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इसी तरह गोवर्धन में 350 आश्रम, गेस्टहाउस, होटल और अन्य इमारत में अग्निरोधी इंतजाम नहीं हैं। वर्षभर श्रद्धालुओं से भरी रहने वाली धर्मनगरी वृंदावन में तो हालात और बदतर हैं। यहां 800 से अधिक इमारतें 45 फुट से ज्यादा ऊंची और 500 वर्ग गज से ज्यादा एरिया में बनी हैं। इनमें भी अग्निशमन पाइपलाइन नहीं डाली गई है। अग्निशमन विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि निरीक्षण में हीलाहवाली के चलते ज्यादातर बिल्डिंगों में फायर एक्सटिंग्युशर या अन्य काम चलाऊ व्यवस्था है।
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15 हाइड्रेंट प्वाइंट दो दशक से खराब
घने शहर में आग बुझाने के लिए नगर पालिका ने 15 प्रमुख स्थानों पर हाइड्रेंट प्वाइंट लगवाए थे। इनमें से ज्यादातर की पाइपलाइन गलकर सड़क में दब गई है। इसमें महाविद्या कालोनी फेज-दो, गोविंद नगर स्थित गल्तेश्वर महादेव मंदिर के निकट, कुशक गली, रैगढ़ मोहल्ला, असकुंडा घाट यमुनापार पैंठ के पास, छगनपुरा, पुलिस लाइन, माया टीला, द्वारिकापुरी, महोली की पौर, रतनकुंड, गली रामपाल, नगर पालिका, पोतराकुंड के पीछे और जनरल गंज में लगे प्वाइंट शामिल हैं।


मुकुंद कांपलेक्स में नहीं हुए इंतजाम
होलीगेट के निकट बने बहुमंजिला कांपलेक्स में 60 दुकानें हैं। सभी में कपड़े का थोक का कारोबार होता है। मार्केट में कपड़े हजारों गांठ पड़ी रहती हैं। दो साल पहले जून माह में ही इस मार्केट के नीचे के हिस्से में लगी आग से आठ दुकान स्वाहा हो गई थीं। इसके बावजूद भी इसमें अग्निरोधी इंतजाम नहीं कराए गए।


सभी इमारतों का निरीक्षण कर नोटिस दिया गया है। उन्हें रिमाइंडर भी दिए लेकिन लोग अग्निरोधी इंतजाम नहीं करा रहे हैं।
बीपी त्रिपाठी  
अग्निशमन अधिकारी, मथुरा
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