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UP: क्या है नफीस...जिससे थाने के सिपाही तैयार करेंगे अपराधियों की डिजिटल कुंडली; मथुरा में लागू हुई व्यवस्था

Mon, 09 Sep 2024 10:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 09 Sep 2024 10:18 AM IST
सार

मथुरा में नफीस यानि नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम की ओर पुलिस ने कदम बढ़ा दिया है। ये ऐसी सिस्टम है, जिसके जरिए अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार की जा सकेगी।
 

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Now police station constables will take fingerprints of criminals
police - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में नफीस (नेशनल ऑटोमेटिक फिंगर प्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम) को थाना स्तर पर स्थापित करने की दिशा में मथुरा पुलिस ने कदम बढ़ा दिया है। अपराधियों के फिंगर प्रिंट थाने के सिपाही भी ले सकें, इसके लिए पुलिस लाइन में स्थित नफीस सेल में प्रत्येक थाने से चार-चार सिपाहियों की प्रथम चरण में ट्रेनिंग हो चुकी है।
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एसपी क्राइम अवनीश मिश्रा ने बताया कि थानों की सिपाहियों की रोस्टर सर्किल वार तैयार किया गया। पुलिस लाइन में स्थापित नफीस सेल के कर्मचारी थाने के सिपाहियों को ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग में उनको अपराधियों के फिंगर प्रिंट लेना सिखाया गया। ताकि उन्हें नफीस सेल तक अपराधियों को न लाना पड़े। सिर्फ फिंगर प्रिंट डाटा लाकर वह सेल में जमा करा देंगे। इसके बाद सेल की टीम द्वारा नफीस पोर्टल पर डाटा फीड कर दिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद अगला चरण थाने स्तर पर ही नफीस सेल स्थापित करने का है। एडीजी तकनीक द्वारा इसके संबंध में पूर्व में ही आदेशित कर रखा है।

 
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हर थाने में स्थापित करना है नफीस सेल
सरकार का लक्ष्य हर थाने में नफीस सेल की स्थापना का है। अभी तक जिले में एक ही सेल संचालित है, जो कि पुलिस लाइन में है। जेल भेजने से पूर्व आरोपियों को यहां लाया जाता है, उनके फिंगर प्रिंट लिए जाते हैं।

 
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बायोलॉजिकल आईडी से वारदातों का खुलासा करेगी पुलिस
पुलिस के अनुसार मुल्जिम को जेल भेजने के दौरान उसे नफीस सेंटर पर लाया जाता है। यहां उसकी बायोलॉजिकल आईडी बनाई जाती है, जिसमें वर्तमान में फिंगरप्रिंट, फेस, फोटो, शरीर पर विशेष निशान व अपराध की जानकारी फीड की जाती है। भविष्य में रेटिना सहित अन्य बायोलॉजिकल डाटा की फीडिंग पर काम होगा। यह पूरी जानकारी एनसीआरबी और एससीआरबी के पोर्टल पर फीड हो रही है। मथुरा सहित प्रदेश के अन्य जिलों के अपराधियों का डाटा भुवनेश्वर और लखनऊ स्थित सर्वर पर सेव हो रहा है।
 

इस प्रकार भविष्य में होगा कारगर
पुलिस के अनुसार नफीस पर संरक्षित किया जा रहा डाटा भविष्य में काफी काम आएगा। मसलन, अपराधियों का बायोलॉजिकल डाटा पुलिस के पास संरक्षित होगा। किसी भी वारदात के क्राइम सीन से पुलिस फिंगर प्रिंट, सीसीटीवी फुटेज आदि लेगी। फिंगर प्रिंट का मिलान नाफीस पोर्टल पर संरक्षित डाटा से किया जाएगा। अगर, किसी पुराने अपराधी ने वारदात की होगी, तो फिंगर प्रिंट डाटा से मिलान कर कंप्यूटर उसका पूरा काला चिट्ठा खोलकर सामने रख देगा। इसके आधार पर पुलिस ब्लाइंड क्राइम मिस्ट्री को चंद मिनटों में सुलझाकर अपराधी तक पहुंच जाएगी।

 

बंदी शिनाख्त अधिनियम 2022 के तहत काम
पुलिस बंदी शिनाख्त अधिनियम 2022 के तहत इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। नफीस पोर्टल पर जिला बदर, निर्वासित अपराधी, संदिग्ध व्यक्ति, अज्ञात व्यक्ति (जिसकी पहचान संबंधी जानकारी प्राप्त नहीं हो पा रही है), दोष सिद्ध, अंडर ट्रायल, गिरफ्तार मुल्जिम का डाटा सेव किया जा रहा है।

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