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वनमाली वासुदेव जय जय श्रीराधारमण...
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भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन(मथुरा)। ठा. राधारमण मंदिर में चल रहे शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में पद्मा कुंज में ठा. राधारमण लाल को बाजरे के लड्डू निवेदित किए गए। ठाकुरजी को रिझाने के लिए भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन ने राग सेवा प्रस्तुत की।
ठा. राधारमण लाल को ठंड से बचाव के लिए गर्म पकवान निवेदित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से ठाकुरजी को दोपहर के समय बाजरे के लड्डू-चूरमा निवेदित किए जा रहे हैं। शाम को ठाकुरजी ने भक्तों को पद्मा कुंज में विराजमान होकर दर्शन दिए। मंदिर सेवायत श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि पद्मजा कुंज सखियों ने ठाकुरजी की निकुंज विलास का सुख देने को तैयार की है। इससे ठाकुरजी विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। राग सेवा में गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन ने वनमाली वासुदेव जय जय श्रीराधारमण..., बसौ मेरे नैनन में नंदलाल... एवं विष्णु स्तुति गाकर समूचे मंदिर परिसर को राधारमणमय कर दिया।
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राग सेवा सुन मंद-मंद मुस्काते हैं हमारे लाड़ले राधारमण लाल: गीताचंद्रन
वृंदावन। ठा. राधारमण लाल में राग सेवा करने आयीं भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन ने कहा कि वृंदावन आने पर उन्हें बहुत आत्मिक शांति का अनुभव होता है। वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करते रहने में भी जीवन का अलग ही आनंद है। वृंदावन आना मेरे ही क्या, हर किसी के लिए आनंद का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि ठाकुर राधारमण लाल के समक्ष राग सेवा करना और स्टेज पर प्रस्तुति देने में जमीन-आसमान का अंतर है। राग सेवा करते समय ऐसा लगता है कि हमारे लाड़ले राधारमण लाल साक्षात सुन रहे हैं और मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं। ठाकुरजी के समक्ष इससे पहले भी वह प्रस्तुति दे चुकी है। यहां के दर्शन करके उन्हें असीमित ऊर्जा प्राप्त होती है।
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ठा. राधारमण लाल को ठंड से बचाव के लिए गर्म पकवान निवेदित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से ठाकुरजी को दोपहर के समय बाजरे के लड्डू-चूरमा निवेदित किए जा रहे हैं। शाम को ठाकुरजी ने भक्तों को पद्मा कुंज में विराजमान होकर दर्शन दिए। मंदिर सेवायत श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि पद्मजा कुंज सखियों ने ठाकुरजी की निकुंज विलास का सुख देने को तैयार की है। इससे ठाकुरजी विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। राग सेवा में गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन ने वनमाली वासुदेव जय जय श्रीराधारमण..., बसौ मेरे नैनन में नंदलाल... एवं विष्णु स्तुति गाकर समूचे मंदिर परिसर को राधारमणमय कर दिया।
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राग सेवा सुन मंद-मंद मुस्काते हैं हमारे लाड़ले राधारमण लाल: गीताचंद्रन
वृंदावन। ठा. राधारमण लाल में राग सेवा करने आयीं भरतनाट्यम नृत्यांगना एवं गायिका पद्मश्री गीताचंद्रन ने कहा कि वृंदावन आने पर उन्हें बहुत आत्मिक शांति का अनुभव होता है। वृंदावन में मंदिरों के दर्शन करते रहने में भी जीवन का अलग ही आनंद है। वृंदावन आना मेरे ही क्या, हर किसी के लिए आनंद का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि ठाकुर राधारमण लाल के समक्ष राग सेवा करना और स्टेज पर प्रस्तुति देने में जमीन-आसमान का अंतर है। राग सेवा करते समय ऐसा लगता है कि हमारे लाड़ले राधारमण लाल साक्षात सुन रहे हैं और मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं। ठाकुरजी के समक्ष इससे पहले भी वह प्रस्तुति दे चुकी है। यहां के दर्शन करके उन्हें असीमित ऊर्जा प्राप्त होती है।
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