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मथुरा: 50 वर्गगज के प्लॉट को लेकर हुआ था खूनी संघर्ष
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मथुरा। 50 वर्गगज के प्लॉट के लिए दो भाइयों की गोली मारकर हत्या की गई थी। यह प्लॉट मृतकों के मकान के बराबर में ही बताया जा रहा है। इस पर मृतक के परिवार का ही कब्जा था। 20 साल पहले यह प्लॉट आरोपियों ने दिया था।
11 अगस्त की देर शाम को शेरगढ़ के पैगांव में जो खूनी खेल खेला गया, वह प्लॉट केवल 50 वर्गगज का है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि 20 साल पहले सुखवीर के परिवार ने यह प्लॉट रतन सिंह को दिया था। अब सुखवीर यह प्लॉट वापस लेना चाहता था, पर रतन सिंह इससे कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं था। पुलिस के अनुसार रतन सिंह के मकान के पास ही यह प्लॉट है।
इस प्लॉट को लेकर ही रतन सिंह और सुखवीर सिंह का परिवार एक-दूसरे का दुश्मन हो गया। कई बार प्लॉट को लेकर झगड़े हुए, पर मामला सुलझ नहीं सका। आखिरकार खूनी संघर्ष में दो सगे भाइयों रतन सिंह और राजेश की हत्या ने जरूर दो परिवारों में काफी बड़ी दुश्मनी की दीवार खड़ी कर दी। एसपी ग्रामीण श्रीशचंद ने बताया कि 50 वर्गगज के प्लॉट को लेकर दो पक्षों में यह विवाद हुआ। हालांकि इस मामले में चार हत्यारोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। इनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।
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शेरगढ़ पुलिस की रही लापरवाही
इस पूरे खूनी संघर्ष में शेरगढ़ पुलिस की लापरवाही साफ उजागर हो रही है। अगर पुलिस सतर्क और सजग होती तो इसे रोका जा सकता था, पर ऐसा नहीं हुआ। जिस प्रकार पुलिस दोहरे हत्याकांड के बाद तेजी दिखा रही है, उसी तरह शुरूआत में दिखाती तो दो जानें बच जातीं। पीड़ित परिवार ने पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी की है।
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11 अगस्त की देर शाम को शेरगढ़ के पैगांव में जो खूनी खेल खेला गया, वह प्लॉट केवल 50 वर्गगज का है। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि 20 साल पहले सुखवीर के परिवार ने यह प्लॉट रतन सिंह को दिया था। अब सुखवीर यह प्लॉट वापस लेना चाहता था, पर रतन सिंह इससे कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं था। पुलिस के अनुसार रतन सिंह के मकान के पास ही यह प्लॉट है।
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इस प्लॉट को लेकर ही रतन सिंह और सुखवीर सिंह का परिवार एक-दूसरे का दुश्मन हो गया। कई बार प्लॉट को लेकर झगड़े हुए, पर मामला सुलझ नहीं सका। आखिरकार खूनी संघर्ष में दो सगे भाइयों रतन सिंह और राजेश की हत्या ने जरूर दो परिवारों में काफी बड़ी दुश्मनी की दीवार खड़ी कर दी। एसपी ग्रामीण श्रीशचंद ने बताया कि 50 वर्गगज के प्लॉट को लेकर दो पक्षों में यह विवाद हुआ। हालांकि इस मामले में चार हत्यारोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। इनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं।
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शेरगढ़ पुलिस की रही लापरवाही
इस पूरे खूनी संघर्ष में शेरगढ़ पुलिस की लापरवाही साफ उजागर हो रही है। अगर पुलिस सतर्क और सजग होती तो इसे रोका जा सकता था, पर ऐसा नहीं हुआ। जिस प्रकार पुलिस दोहरे हत्याकांड के बाद तेजी दिखा रही है, उसी तरह शुरूआत में दिखाती तो दो जानें बच जातीं। पीड़ित परिवार ने पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से भी की है।