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मथुरा: भगवान श्री रंगनाथ का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव 20 मार्च से
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वृंदावन (मथुरा)। उत्तर भारत में दक्षिणात्य शैली के सबसे विशाल देवालय श्रीरंगनाथ मंदिर दिव्यदेश का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव 20 मार्च से प्रारंभ होगा। इसमें महोत्सव का मुख्य आकर्षण रथ का मेला 26 मार्च को आयोजित किया जाएगा।
मंदिर की मुख्य अधिशासी अधिकारी अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि मंदिर की वैदिक पूजा पद्धति हो या उत्सवों की श्रंखला सब कुछ वैदिक परंपराओं पर आधारित है। दक्षिण की वैदिक भूमि से ब्रज में भक्ति की भूमि पर साधना करने आए परम तपस्वी संत रंगदेशिक महाराज की सद्प्रेरणा से मथुरा के धनिक भक्त राधाकृष्ण, लक्ष्मी चंद, गोविंददास ने इस मंदिर का निर्माण कराया। संवत 1901 से प्रारंभ हुए विशालकाय मंदिर का निर्माण 1906 में पूर्ण हुआ, जिसमें वैदिक रीति रिवाज से श्री गोदा रंगनाथ, श्री वैंकटेश्वर, श्री सुदर्शन जी, श्री वैष्णव संप्रदाय के अर्चावतार, श्री रामानुज स्वामीजी के चल अचल विग्रह स्थापित हुए।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मा द्वारा बनाए इस उत्सव को ब्रह्मोत्सव कहते हैं। इस उत्सव में भगवान भक्तों के बीच जा कर दर्शन देते हैं। इस बार ब्रह्मोत्सव (रथ का मेला) 20 मार्च से शुरू होगा। इस मेले में प्रात: और सांयकाल भगवान रंगनाथ विभिन्न स्वर्ण रजत निर्मित वाहनों पर विराजमान हो कर मंदिर से बैंडबाजों के साथ निकलेंगे। इस उत्सव में 25 मार्च को होली, 26 मार्च को रथ यात्रा और 27 मार्च को बड़ी आतिशबाजी प्रमुख रूप से रहेगी। रघुनाथ आचार्य ने बताया कि ब्राहेत्सव का शुभारंभ वैदिक परंपरानुसार ध्वजारोहण से होगा।
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मंदिर की मुख्य अधिशासी अधिकारी अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि मंदिर की वैदिक पूजा पद्धति हो या उत्सवों की श्रंखला सब कुछ वैदिक परंपराओं पर आधारित है। दक्षिण की वैदिक भूमि से ब्रज में भक्ति की भूमि पर साधना करने आए परम तपस्वी संत रंगदेशिक महाराज की सद्प्रेरणा से मथुरा के धनिक भक्त राधाकृष्ण, लक्ष्मी चंद, गोविंददास ने इस मंदिर का निर्माण कराया। संवत 1901 से प्रारंभ हुए विशालकाय मंदिर का निर्माण 1906 में पूर्ण हुआ, जिसमें वैदिक रीति रिवाज से श्री गोदा रंगनाथ, श्री वैंकटेश्वर, श्री सुदर्शन जी, श्री वैष्णव संप्रदाय के अर्चावतार, श्री रामानुज स्वामीजी के चल अचल विग्रह स्थापित हुए।
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उन्होंने बताया कि ब्रह्मा द्वारा बनाए इस उत्सव को ब्रह्मोत्सव कहते हैं। इस उत्सव में भगवान भक्तों के बीच जा कर दर्शन देते हैं। इस बार ब्रह्मोत्सव (रथ का मेला) 20 मार्च से शुरू होगा। इस मेले में प्रात: और सांयकाल भगवान रंगनाथ विभिन्न स्वर्ण रजत निर्मित वाहनों पर विराजमान हो कर मंदिर से बैंडबाजों के साथ निकलेंगे। इस उत्सव में 25 मार्च को होली, 26 मार्च को रथ यात्रा और 27 मार्च को बड़ी आतिशबाजी प्रमुख रूप से रहेगी। रघुनाथ आचार्य ने बताया कि ब्राहेत्सव का शुभारंभ वैदिक परंपरानुसार ध्वजारोहण से होगा।
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