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मथुरा: तापमान ४४ तक पहुंचा, २२०० में से आधे तालाब सूखे
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नौहझील मानागढ़ी में सूखा पड़ा तालाब।
मथुरा। एक तरफ सूरज की तपिश तो दूसरी ओर सूखे तालाब। किसानोें के प्यासे पशु केवल घर से निकली गंदी नालियों के पानी से भरी पोखरों का पानी पीने को मजबूर। शासन की सख्ती के बावजूद भी २२०० मेें से आधे तालाबों में ही पानी भरा हुआ है। बाकी के तालाबों को भरने के लिए ग्राम पंचायत विभाग सिंचाई विभाग के सक्रिय होने का इंतजार कर रहा है।
तापमान ४४ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी का आलम यह है कि पशुओें के हलक सूख रहे हैं लेकिन गांवों में तालाबों और पोखरोें में पानी नहीं है और यदि पानी है भी तो वह इतना खराब है कि पशु ऐसे पानी को पी नहीं पा रहे हैं।
जनपद में करीब २२०० तालाब हैं। पंचायत राज विभाग के अनुसार इन तालाबों में से करीब २५ प्रतिशत तालाबों में पानी नहीं है। इन तालाबों को भरने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी किरण चौधरी ने बैठक मेें सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जानकारी भी दी है। उन्होंने बताया कि २५ प्रतिशत तालाबों में पानी नहीं है। यह वह तालाब हैं जो कि गांव से बाहर हैं और केवल रजबहा आदि से भरे जा सकते हैं, बाकी सभी तालाबोें में घरों का पानी आता है। कुछ तालाबों के भरने का कोई संसाधन ही नहीं है। यह जानकारी देते हुए डीपीआरओ ने बताया कि इन तालाबों के लिए पाइप लाइन डाली जा रही है।
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७ लाख ९० हजार पशुओं के लिए चाहिए पानी
वर्तमान में जनपद में कुल ७ लाख ९० हजार पशु हैं। जिनको पाला जाता है। इन पशुओें से गोवंश २ लाख ७२ हजार, २०-३० प्रतिशत भैंस आदि हैं। इन सभी के लिए पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। सीवीओ (चीफ वेटरनेरी ऑफिसर) डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि पशुओं को पीने के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। वह इस संबंध में ग्रामीणों को जागरूक करते हैं।
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तापमान ४४ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी का आलम यह है कि पशुओें के हलक सूख रहे हैं लेकिन गांवों में तालाबों और पोखरोें में पानी नहीं है और यदि पानी है भी तो वह इतना खराब है कि पशु ऐसे पानी को पी नहीं पा रहे हैं।
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जनपद में करीब २२०० तालाब हैं। पंचायत राज विभाग के अनुसार इन तालाबों में से करीब २५ प्रतिशत तालाबों में पानी नहीं है। इन तालाबों को भरने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी किरण चौधरी ने बैठक मेें सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जानकारी भी दी है। उन्होंने बताया कि २५ प्रतिशत तालाबों में पानी नहीं है। यह वह तालाब हैं जो कि गांव से बाहर हैं और केवल रजबहा आदि से भरे जा सकते हैं, बाकी सभी तालाबोें में घरों का पानी आता है। कुछ तालाबों के भरने का कोई संसाधन ही नहीं है। यह जानकारी देते हुए डीपीआरओ ने बताया कि इन तालाबों के लिए पाइप लाइन डाली जा रही है।
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७ लाख ९० हजार पशुओं के लिए चाहिए पानी
वर्तमान में जनपद में कुल ७ लाख ९० हजार पशु हैं। जिनको पाला जाता है। इन पशुओें से गोवंश २ लाख ७२ हजार, २०-३० प्रतिशत भैंस आदि हैं। इन सभी के लिए पानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। सीवीओ (चीफ वेटरनेरी ऑफिसर) डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि पशुओं को पीने के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। वह इस संबंध में ग्रामीणों को जागरूक करते हैं।