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Mathura News: श्रीकृष्ण जन्मस्थान और द्वारिकाधीश मंदिर में छाई केसरी घटा, भक्तों ने किए दर्शन
Wed, 27 Jul 2022 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2022 12:18 AM IST
सार
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान (जन्मभूमि) और मंदिर श्रीद्वारिकाधीश में मंगलवार से घटाओं का आयोजन शुरू हो गया है। पहले दिन दोनों प्रमुख मंदिरों में केसरी घटा छा गईं। इस दौरान ठाकुरजी की अद्भुत छवि देख भक्त आनंदित हो उठे।
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मंदिर श्री द्वारिकाधीश में सजी केसरी घटा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में विराजमान ठाकुर श्रीकेशवदेव जी के मंदिर में सावन मास के परंपरागत रूप से घटाओं का आयोजन केसरी घटा के साथ हो गया है। सावन की कृष्ण त्रयोदशी से यह आयोजन शुक्ल पूर्णिमा 12 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान के श्रीकेशवदेव मंदिर में विभिन्न प्रकार की भव्य एवं आकर्र्षित घटाओं के दर्शन होंगे।
इसके पहले दिन ठाकुर श्री केशवदेव जी ने केसरिया वस्त्र, केसरिया पुष्प, पत्र एवं केसरिया रंग की विद्युत सजावट के मध्य भव्य बंगले में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सायं 4 बजे से केसरी घटा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमडे़। विभिन्न रंग-बिरंगी घटाओं के दर्शन सायं 4 से रात 9 बजे तक भक्तों ने किए।
इसी प्रकार मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश में भी संपूर्ण जगमोहन को केसरिया कपड़े से सजाया गया। मौसम के अनुरूप जगमोहन में भव्य सजावट की गई। इसमें घोड़े, ग्वाल-बाल, घास आदि मौजूद थे। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय में ठाकुर जी की सेवा का जो स्वरूप है वह बालस्वरूप है। इसलिए घटाओं से तात्पर्य यह है कि ठाकुर जी को बाहर के मौसम की अनुभूति कराना ही घटा है। सावन में जिस प्रकार बादलों का मौसम रहता है उसी प्रकार की घटाओं का आयोजन कराया जाता है।
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इसके पहले दिन ठाकुर श्री केशवदेव जी ने केसरिया वस्त्र, केसरिया पुष्प, पत्र एवं केसरिया रंग की विद्युत सजावट के मध्य भव्य बंगले में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सायं 4 बजे से केसरी घटा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमडे़। विभिन्न रंग-बिरंगी घटाओं के दर्शन सायं 4 से रात 9 बजे तक भक्तों ने किए।
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इसी प्रकार मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश में भी संपूर्ण जगमोहन को केसरिया कपड़े से सजाया गया। मौसम के अनुरूप जगमोहन में भव्य सजावट की गई। इसमें घोड़े, ग्वाल-बाल, घास आदि मौजूद थे। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय संप्रदाय में ठाकुर जी की सेवा का जो स्वरूप है वह बालस्वरूप है। इसलिए घटाओं से तात्पर्य यह है कि ठाकुर जी को बाहर के मौसम की अनुभूति कराना ही घटा है। सावन में जिस प्रकार बादलों का मौसम रहता है उसी प्रकार की घटाओं का आयोजन कराया जाता है।
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