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मथुरा: ‘लगता था कि अब वतन नहीं लौट पाएंगे’
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मथुरा। यूक्रेन के सूमी से लौटे छात्र मनीष का स्वागत करने के बाद खड़े सौंख चेयरमैन व परिजन।
- फोटो : MATHURA
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सौंख (मथुरा)। युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसा एमबीबीएस का छात्र मनीष आखिरकार शनिवार को सकुशल घर पहुंच गया। लंबी प्रतीक्षा और सूमी शहर में तमाम दुश्वारियों से गुजरने के बाद घर पहुंचे मनीष को देख परिजनों की आंखों में आंसू छलक उठे। मनीष ने कहा कि हमें लग रहा था कि अब हम अपने वतन नहीं लौट पाएंगे, लेकिन घर आकर राहत मिली है।
सौंख के रहने वाले अशोक ने बताया कि सूमी शहर में फंसे भारतीयों को लेकर शुक्रवार रात ही जहाज दिल्ली आया था। शनिवार को मनीष ने यूक्रेन के शहर सूमी की स्थितियों से अवगत कराया। कहा कि यूक्रेन में सबके बाद सूमी में फंसे छात्र ही निकल सके हैं।
इस दौरान तमाम मुश्किल हालात से उन्हें जूझना पड़ा। सूमी शहर में जब-जब धमाके होते थे तभी हम सभी छात्र बंकर में पहुंच जाते थे। धमकों की आवाजों को सुनकर डर लगाता रहता था। 16 दिन सभी ने डर और भय के साथ गुजारे हैं। सूमी से निकलने के लिए उन्होंने अपने साथियों के साथ कई बार कोशिश की। कोलतावा के लिए जाने से पहले ही १० किलोमीटर दूरी पर धमाका हो गया था। इन परिस्थितियों के चलते लगने लगा था कि अब घर नहीं लौट पाएंगे। वतन वापसी के लिए भारत सरकार ने बहुत सहायता की।
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पिता अशोक व मां सीमा देवी ने बताया कि हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारा बेटा सकुशल लौट पाएगा। सरकार की मदद नहीं मिलती तो पता नहीं क्या होता। इस मौके पर मनीष का चेयरमैन भरतसिंह ने पुष्प भेंट कर अभिवादन किया। भगवान सिंह, जयराम, प्रमोद कुमार, दिनेश, राजेश सिंह, सुरेश चौधरी, वीरवती, राजेंद्री देवी, समुंद्र सिंह, संतोष सिंह, लक्ष्मन सिंह आदि उपस्थित थे।
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सौंख के रहने वाले अशोक ने बताया कि सूमी शहर में फंसे भारतीयों को लेकर शुक्रवार रात ही जहाज दिल्ली आया था। शनिवार को मनीष ने यूक्रेन के शहर सूमी की स्थितियों से अवगत कराया। कहा कि यूक्रेन में सबके बाद सूमी में फंसे छात्र ही निकल सके हैं।
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इस दौरान तमाम मुश्किल हालात से उन्हें जूझना पड़ा। सूमी शहर में जब-जब धमाके होते थे तभी हम सभी छात्र बंकर में पहुंच जाते थे। धमकों की आवाजों को सुनकर डर लगाता रहता था। 16 दिन सभी ने डर और भय के साथ गुजारे हैं। सूमी से निकलने के लिए उन्होंने अपने साथियों के साथ कई बार कोशिश की। कोलतावा के लिए जाने से पहले ही १० किलोमीटर दूरी पर धमाका हो गया था। इन परिस्थितियों के चलते लगने लगा था कि अब घर नहीं लौट पाएंगे। वतन वापसी के लिए भारत सरकार ने बहुत सहायता की।
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पिता अशोक व मां सीमा देवी ने बताया कि हमें उम्मीद नहीं थी कि हमारा बेटा सकुशल लौट पाएगा। सरकार की मदद नहीं मिलती तो पता नहीं क्या होता। इस मौके पर मनीष का चेयरमैन भरतसिंह ने पुष्प भेंट कर अभिवादन किया। भगवान सिंह, जयराम, प्रमोद कुमार, दिनेश, राजेश सिंह, सुरेश चौधरी, वीरवती, राजेंद्री देवी, समुंद्र सिंह, संतोष सिंह, लक्ष्मन सिंह आदि उपस्थित थे।