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सीडीएल में होगा ड्यूराजेसिक का टेस्ट
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 29 Jan 2016 11:43 PM IST
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए आए ड्यूराजेसिक टैबलेट की गुणवत्ता अब सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी कोलकाता (सीडीएल) में परखी जाएगी। ये दवा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय और महर्षि दयानंद अस्पताल के स्टोर में मरीजों के वितरण के लिए आई थी।
जिला औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने 14 अक्तूबर 2014 को सीएमओ कार्यालय के सीएमएसडी दवा स्टोर से ड्यूराजेसिक दवा का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। इसी दवा का नमूना 11 दिसंबर 2014 को महर्षि दयानंद अस्पताल के दवा स्टोर से लिया गया। इस दवा का निर्माण ऑरनेट लैब मुजफ्फरपुर बिहार में किया जा रहा था।
इन दोनों ही दवाओं के नमूने गवर्नमेंट ड्रग लैबोरेटरी लखनऊ में फेल हो गए। इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। चूंकि ये दवा सरकारी सप्लाई में थी ऐसे में औषधि विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई के लिए मुख्यालय को लिखा। इधर कंपनी संचालक ने ड्रग एक्ट में मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस निर्णय को चुनौती दी है। इस पर दवा का नमूना सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी कोलकाता भेजा जा रहा है। अब ये लैब दवा की गुणवत्ता को मानकों की कसौटी पर कसेगी।
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ऑक्सीटोसिन कारोबारी की तलाश
ऑक्सीटोसिन के जिस कारोबारी को पुलिस ने पकड़कर ड्रग विभाग को सूचित किया था अब वो ही कारोबारी पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहा है। ऐसे में औषधि विभाग मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। 14 अप्रैल 2015 को चौकी बागबहादुर पुलिस ने एक आटो से कुछ शीशियां पकड़ीं और ड्रग विभाग को सूचना दी।
इस पर औषधि निरीक्षक ने दवाओं की जांच प्रयोगशाला में करवाई। लैब में इसे प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की संज्ञा दी तो औषधि विभाग ने पुलिस को समन भेजकर आरोपी अजय अग्रवाल को तामील कराने के लिए कहा। अब पुलिस को आरोपी अजय अग्रवाल ढूंढे नहीं मिल रहा है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट लिखित में विभाग को सौंप दी है। इस पर अब विभाग न्यायालय में वाद दायर करने की तैयारी कर रहा है।
ड्यूराजेसिक दवा का नमूना राज्य की लैब में फेल हो गया। इसके बाद कंपनी संचालक ने चुनौती देते हुए सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी में जांच की मांग की। अब नमूना सीडीएल भेजा जा रहा है।
दीपक कुमार
जिला औषधि निरीक्षक
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जिला औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने 14 अक्तूबर 2014 को सीएमओ कार्यालय के सीएमएसडी दवा स्टोर से ड्यूराजेसिक दवा का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। इसी दवा का नमूना 11 दिसंबर 2014 को महर्षि दयानंद अस्पताल के दवा स्टोर से लिया गया। इस दवा का निर्माण ऑरनेट लैब मुजफ्फरपुर बिहार में किया जा रहा था।
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इन दोनों ही दवाओं के नमूने गवर्नमेंट ड्रग लैबोरेटरी लखनऊ में फेल हो गए। इस रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। चूंकि ये दवा सरकारी सप्लाई में थी ऐसे में औषधि विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई के लिए मुख्यालय को लिखा। इधर कंपनी संचालक ने ड्रग एक्ट में मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस निर्णय को चुनौती दी है। इस पर दवा का नमूना सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी कोलकाता भेजा जा रहा है। अब ये लैब दवा की गुणवत्ता को मानकों की कसौटी पर कसेगी।
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ऑक्सीटोसिन कारोबारी की तलाश
ऑक्सीटोसिन के जिस कारोबारी को पुलिस ने पकड़कर ड्रग विभाग को सूचित किया था अब वो ही कारोबारी पुलिस को ढूंढे नहीं मिल रहा है। ऐसे में औषधि विभाग मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। 14 अप्रैल 2015 को चौकी बागबहादुर पुलिस ने एक आटो से कुछ शीशियां पकड़ीं और ड्रग विभाग को सूचना दी।
इस पर औषधि निरीक्षक ने दवाओं की जांच प्रयोगशाला में करवाई। लैब में इसे प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की संज्ञा दी तो औषधि विभाग ने पुलिस को समन भेजकर आरोपी अजय अग्रवाल को तामील कराने के लिए कहा। अब पुलिस को आरोपी अजय अग्रवाल ढूंढे नहीं मिल रहा है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट लिखित में विभाग को सौंप दी है। इस पर अब विभाग न्यायालय में वाद दायर करने की तैयारी कर रहा है।
ड्यूराजेसिक दवा का नमूना राज्य की लैब में फेल हो गया। इसके बाद कंपनी संचालक ने चुनौती देते हुए सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी में जांच की मांग की। अब नमूना सीडीएल भेजा जा रहा है।
दीपक कुमार
जिला औषधि निरीक्षक