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राधा वल्लभ मंदिर में गुलाल की होली 4 से
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वृंदावन (मथुरा)। फाल्गुन मास की फुलेरा दूज यानि चार मार्च को ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में गुलाल की होली शुरू होगी। इस दौरान ठाकुर राधावल्लभलाल कमर में फेंटा बांधकर भक्तों पर गुलाल की बरसा करेेंगे। वहीं, सेवायत गोस्वामियों द्वारा ठाकुरजी के कपोल (गाल) पर गुलाल लगाया जाएगा।
मंदिर के सेवायत विशाल लाल गोस्वामी ने बताया कि फुलेरा दूज से ठाकुरजी की कमर में फेंटा बांधकर कपोलों पर गुलाल लगाने के साथ मंदिर में होली गायन के मध्य गुलाल से होली खेलने की शुरुआत हो जाएगी। इसी के साथ मंदिर में अबीर-गुलाल की होली शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि सुबह की मंगला आरती के बाद 8:15 होने वाली शृंगार आरती के बाद से मंदिर में गुलाल की होली का आयोजन होगा। मंदिर की सभी आरती में ठाकुरजी भक्तों के साथ होली खेलेंगे। इसके साथ ही राधादामोदर मंदिर, राधा श्याम सुंदर मंदिर एवं प्रियावल्लभ मंदिर में भी होली खेली जाएगी।
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फूलों से होता है राधा-कृष्ण का शृंगार
फुलेरा दूज को फूलों का त्योहार भी कहते हैं। क्योंकि फाल्गुन में कई तरह के सुंदर और रंगबिरंगे फूलों का आगमन होता है और इन्हीं फूलों से राधा-कृष्ण का शृंगार किया जाता है। ज्योतिषाचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण होली की तैयारी करने लगते थे और होली आने पर पूरे गोकुल को गुलाल से रंग देते थे।
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मंदिर के सेवायत विशाल लाल गोस्वामी ने बताया कि फुलेरा दूज से ठाकुरजी की कमर में फेंटा बांधकर कपोलों पर गुलाल लगाने के साथ मंदिर में होली गायन के मध्य गुलाल से होली खेलने की शुरुआत हो जाएगी। इसी के साथ मंदिर में अबीर-गुलाल की होली शुरू होगी।
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उन्होंने बताया कि सुबह की मंगला आरती के बाद 8:15 होने वाली शृंगार आरती के बाद से मंदिर में गुलाल की होली का आयोजन होगा। मंदिर की सभी आरती में ठाकुरजी भक्तों के साथ होली खेलेंगे। इसके साथ ही राधादामोदर मंदिर, राधा श्याम सुंदर मंदिर एवं प्रियावल्लभ मंदिर में भी होली खेली जाएगी।
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फूलों से होता है राधा-कृष्ण का शृंगार
फुलेरा दूज को फूलों का त्योहार भी कहते हैं। क्योंकि फाल्गुन में कई तरह के सुंदर और रंगबिरंगे फूलों का आगमन होता है और इन्हीं फूलों से राधा-कृष्ण का शृंगार किया जाता है। ज्योतिषाचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण होली की तैयारी करने लगते थे और होली आने पर पूरे गोकुल को गुलाल से रंग देते थे।