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Mathura News: वाहन की फिटनेस करवाना, लोहे के चने चबाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2023 12:41 AM IST
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Getting vehicle fit, chewing iron gram
मथुरा। परिवहन विभाग के ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से लाइसेंस बनवाना हो या फिर वाहन की फिटनेस करानी हो। सरकारी फीस से काम कराना मतलब लोहे के चने चबाने जैसा है। यदि कोई बिना दलाल के अपना काम कराने का प्रयास करता है तो उसकी सरकारी फीस तो डूबती है साथ ही काम भी नहीं होता है। फिटनेस के लिए सरकार ने जो फीस निर्धारित की है उसके ऊपर दो से तीन गुना सुविधा शुल्क वसूला जा रहा है।अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में लाइसेंस का ही नहीं बल्कि वाहनों की फिटनेस पर वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क का भी खुलासा हुआ। ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) में वाहनों की फिटनेस पर तीन से चार गुना वसूली हो रही है। इंस्टीट्यूट के बाहर बैठे दलाल तो यहां तक दावा करते हैं कि बिना हमारी मदद के वाहन की फिटनेस नहीं हो सकती है और ऐसा होता भी है। उनके पास इस तरह का पूरा रिकाॅर्ड भी जो कि उन्होंने दिखाया भी। एक दलाल ने कहा कि अंदर आरआई से लेकर पटल पर बैठे बाबू तक सभी का हिस्सा होता है। यदि सुविधा शुल्क नहीं दिया तो गाड़ी में कोई न कोई कमी बताकर उसकी फिटनेट नहीं की जाएगी।
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फिटनेस कराने में इन कागजों की होती है आवश्यकता
वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए पहले सरकारी फीस कटवानी पड़ती है। इसके बाद कंप्यूटर फिटनेस के लिए ट्रेनिंग सेंटर जाने की तारीख बताता है। वाहन की फिटनेस के लिए फॉर्म 20, फॉर्म 21, फॉर्म 22, फार्म 38 को भरने के बाद बीमा, रोड टैक्स की रसीद, वाहन का ऑरिजनल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, प्रदूषण प्रमाणपत्र, आईडी, एड्रेस प्रूफ, पासपोर्ट साइज फोटो, परमिट का सर्टिफिकेट और पेमेंट फीस की रसीद आवश्यक है।
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फिटनेस में यह देखा जाता है
सबसे पहले वाहन के टायरों की जांच होती है, वाहन में किसी भी प्रकार की दरार, विंड स्क्रीन, वाहन की बॉडी ठीक होनी चाहिए, वाणिज्यिक वाहनों के नियमों के अनुसार रिफ्लेक्टिव टेप और रिफ्लेक्टर लगे होने चाहिए। वाहन में किसी प्रकार का बदलाव न किया गया हो। यदि इसमें से किसी एक मानक पर वाहन खरा नहीं उतरा तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनेगा, लेकिन यदि आप दलाल के माध्यम से कराते हैं तो सभी नियमों को दरकिनार करके फिटनेस कर दी जाती है।
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बिना फिटनेस के वाहन चलाने पर जाना पड़ सकता है जेल
बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के यदि कोई चालक वाहन को चलाता है और वह पकड़ा जाता है तो पहली बार दो से पांच हजार, दूसरी बार पांच से 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। इसके साथ ही दूसरी बार में ही वाहन मालिक को जेल भी जाना पड़ सकता है।

दो से तीन हजार रुपये में होती है फिटनेस
परिवहन विभाग ने प्रत्येक वाहन की फिटनेस के लिए फीस निर्धारित कर रखी है। तीन व चार पहिया वाहन की सरकारी फीस 600 रुपये है, जबकि ट्रक, बस और लोडर की सरकारी फीस 800 रुपये है। यहां जैसा ग्राहक पट जाए उसी हिसाब से उसकी वसूली की जाती है। आम तौर पर दलाल दो से तीन हजार रुपये तक वसूलते हैं। जबकि अधिकारियों के पास 500 से एक हजार रुपये प्रति वाहन के हिसाब से दलालों को भुगतान करना पड़ता है।



फिटनेस में वसूली की मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो जल्द ही लाइसेंस और वाहन की फिटनेस में पारदर्शिता आने वाली है। परिवहन विभाग इसके लिए कार्य कर रहा है।
-प्रदीप कुमार, एआरटीओ प्रशासन


रोजाना 40 वाहनों के फिटनेस का स्लॉट है, लेकिन कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए तो प्रतिदिन औसतन 25 वाहन ही फिटनेस के लिए आते हैं।
- नीतू शर्मा, आरआई
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